About Tenali Raman In Hindi | तेनाली रामा जीवन परिचय

Information About Tenali Raman In Hindi | तेनाली रामा जीवन परिचय
                                               तेनाली रामा जीवन परिचय 

About Tenali Raman In Hindi - हम सभी ने बचपन में किसी न किसी माध्यम से तेनाली रामा (Information About Tenali Raman In Hindi ) के नाम से जरूर कभी परिचित हुवे होंगे। तेनाली रामा या तेनाली रामकृष्णा की कहानियाँ स्कूल की किताबो या दूसरी कहानी की किताबो में बचपन में हमने पढ़ा होगा।

तेनाली रामा एक चतुर आदमी होने के साथ साथ एक हास्य कवी भी थे जिनकी हास्य रचनाएँ हास्य के साथ-साथ शिक्षा प्रदान करने वाली भी होती हैं। आइये आज हम तेनाली राम के जीवन से जुडी बातो को जानते हैं और उनकी कुछ कहानियाँ पढ़ते हैं।

तेनाली राम अपने हास्य परन्तु बुद्धिमता से परिपूर्ण और कटु सत्य को बताने वाले कवी के रूप में विख्यात हैं। तेनाली राम अपने विलक्षण बुद्धि और हास्य बोध के कारण प्रसिद्द हुवे। वे एक तेलगु कवी थे जिन्हे विकटकवी या विदूषक  के रूप में भी जाना जाता हैं। 

भारतीय नाट्य में विदूषक एक हसाने वाला किरदार होता हैं जिसके मंच पर आते ही माहौल हास्यास्पद हो जाता हैं। वह स्वयं अपना या अपने परिवेश पर चुटकी लेता हैं या मजाक बनाता हैं। उसके कथन द्विअर्थी होते हैं एक तरफ हास्य को जन्म देते हैं तो दूसरी तरफ कटु सत्य भी बयान करते हैं। 
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About Tenali Raman In Hindi

तेनाली विजयनगर साम्राज्य के राजा कृष्णदेवराय के दरबार में आठ रत्नो में से एक थे। तेनाली रामा का पूरा नाम तेनाली रामालिंगाचार्युलु था जो बाद में तेनाली रामकृष्ण हो गया। रामा का जन्म 16 सदी के प्रारम्भ में ठुमुलुरु नामक गाँव में हुआ था। कुछ इतिहासकारो का कहना हैं की इनका जन्म तेनाली नामक नगर में हुआ था। और इसी वजह से उनके नाम में तेनाली जुड़ गया था। तेनाली का परिवार एक तेलगु भट्ट ब्राह्मण परिवार था। तेनाली के माता-पिता का नाम लक्षम्मा देवी और गरालपति रामैया था। रामकृष्ण के जन्म का नाम गरालपति रामाकृष्णा शर्मा था।


रामकृष्ण के पिताजी तेनाली नगर के एक प्रसिद्द मंदिर में पुरोहित का कार्य करते थे। तेनाली के पिताजी का मृत्यु उनके बालयकाल में ही हो गया था इसीलिए उनकी माँ उनको लेकर अपने भाई के पास आ गई। तेनाली का पालन पोषण उनके मामा के यहाँ ही हुआ वही वो बड़े हुवे। बचपन में कोई शिक्षा प्राप्त नहीं  किया फिर भी वो कई भाषाओ में उन्होंने महारथ हासिल की और प्रकांड विद्वान् बने।

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प्रसिद्द लोकोक्तियों के अनुसार शैव होने के कारण तेनाली रामा को कोई वैष्णव विद्वान अपना शिष्य बनाने को तैयार नहीं होता था। वे गुरु की खोज में थे फिर एक मुनि मिले और उन्होंने तेनाली को माँ काली की तपस्या करने की राय दिया। मुनि की बात मान कर तेनाली माँ काली की तपस्या में रत हो गए। उन्होंने माँ काली की कठिन तपस्या की और खूब पूजा-पाठ किया।


Information About Tenali Raman In Hindi

तेनाली के तपस्या से प्रसन्न होकर माँ काली ने उन्हें साक्षात् दर्शन दिया और दो कटोरे भी प्रदान किया जिसमे एक दही से भरा था जो धन का प्रतिक था तथा दूसरा दूध से भरा हुआ था जो ज्ञान और बुद्धि का प्रतिक था। माँ काली ने तेनाली से दोनों कटोरे में से किसी एक को लेने को कहा। तेनाली राम ने हाथ जोड़कर माँ काली से निवेदन कर दोनों कटोरे ले लिए। माँ काली के दिए हुवे वरदान की वजह से आगे चलकर तेनाली बहुत ही धनवान तथा प्रकांड विद्वान् हुवे।

Stetue Of Tenali Ramakrishna
Stetue Of Tenali Ramakrishna


अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए तेनाली भागवत मेला के एक प्रिसद्ध मंडली में कार्य करने लगे थे। उस मंडली के साथ मिलकर तेनाली विजयनगर में घूम-घूम कर कार्यक्रम किया करते थे। कहा जाता हैं की विजयनगर में एक कार्यक्रम के दौरान वहाँ के राजा कृष्णदेवराय तेनाली के रचनाओं से और उनके कार्यक्रम से बहुत प्रभावित हुवे तथा उन्होंने तेनाली को अपने दरबार में कवी के रूप में रख लिया। तेनाली ने कृष्णदेव के दरबार में कवी के रूप में कार्य करना प्रारम्भ कर दिया।

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तेनाली अपनी चतुर बुद्धि से से राजा के बड़े-से-बड़े समस्या का समाधान सरलता से निकाल देते थे। राम सिर्फ लिखते ही नहीं थे बल्कि उन्होंने एक बार अपने कुशाग्र बुद्धि से विजयनगर को दिल्ली सल्तनत से बचाया भी था। उनके इस इस विलक्षण प्रतिभा के महाराज कृष्णदेव बहुत कायल हो गए थे। अगर हम राजा कृष्णदेव और तेनाली रामा की जोड़ी को अकबर-बीरबल की जोड़ी जैसा कहे तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

Tenali Raman History In Hindi 

अपनी बुद्धिमता से वो कठिन से कठिन समस्या का समाधान बहुत ही सरलता से निकाल लेते थे। उनकी प्रसिद्धि पुरे भारतवर्ष से बाहर भी फैली।  विजयनगर राजा के पसंदीदा दिग्गजों में से एक थे लेकिन विजयनगर के राज-पुरोहित तेनाली से जलते थे और वैर रखते थे।


राजपुरोहित अपने शिष्यों के साथ मिलकर तेनाली को हर समय संकट में डालने का योजना बनाते रहते थे। लेकिन अपनी तीक्ष्ण बुद्धि से तेनाली उनकी सभी योजनाओ पर पानी फेर देते थे और अपना बचाव कर लेते थे।


हिन्दू धर्म से सम्बंधित रचनाओं में भी तेनाली पीछे नहीं हैं उन्होंने अनेक धार्मिक रचनाये भी की हैं। तेलगु साहित्य में उच्च स्थान पर पदासीन पांडुरंग महात्मयं तेनाली रामा द्वारा ही लिखित हैं जो बहुत ही प्रसिद्द हैं। इस काव्य को तेलगु भाषा के साहित्यो में पंचमहाकाव्यो में एक कहा जाता हैं।


तेनाली रामाकृष्णा मूल रूप से शैव थे और रामलिंग के नाम से जाने जाते थे पर बाद में उन्होंने अपना नाम बदलकर रामकृष्ण रख लिया। तेनाली की धर्मपत्नी का नाम शारदा देवी तथा एक पुत्र का नाम भास्कर शर्मा था।

About Tenali Raman In Hindi धारावाहिक में तेनाली रामा का किरदार
About Tenali Raman In Hindi धारावाहिक में तेनाली रामा का किरदार 

तेनाली रामा पर बनी फिल्मे और धारावाहिक 

रामा जैसा प्रसिद्ध किरदार के ऊपर अनेक भाषाओ में कई मूवी और धारावाहिक बन चुकी हैं। इनके जीवन पर कन्नड़ भाषा में एक फिल्म भी बना। बच्चो के लिए खास तौर पर कार्टून निर्माताओं ने तेनाली रामा की कहानियों पर मूवी और सीरियल बनाये हैं जिन्हे बच्चे बहुत पसंद करते हैं। ऐसे ही एक प्रिसद्ध कार्टून मूवी का नाम 'द एडवेंचर ऑफ़ तेनाली रामा हैं।' 
                                          

इसके अलावा सोनी टीवी चैनल पर भी तेनाली रामा के जीवन पर आधारित धारावाहिक प्रसारित होती हैं। दूरदर्शन पर भी पहले तेनाली रामा नाम से नाटक प्रसारित हुआ करता था जो बहुत ही शिक्षाप्रद तथा प्रेरक भी था। मूवी के अलावा तेनाली से जुडी कई किताबे लिखी गई हैं उनकी कहानियों का संग्रह आज हमें अनेक किताबो के रूप में किसी भी बुक स्टाल पर आसानी से उपलब्ध हो जाता हैं। 


आखिर ऐसे कौन से प्रमुख गुण थे तेनाली रामा के अंदर जिसने उन्हें महान विद्वान् तथा प्रसिद्द बना दिया इस बात की पुष्टि के लिए हमें उनके कहानियों को पढ़ना चाहिए उनके जीवन की घटनाओ पर आधारित कहानियाँ बहुत ही प्रेरक और शिक्षाप्रद होती हैं। तेनाली राम के विलक्षण बुद्धि का पता उनके कहानियों से आसानी से चल जाता हैं तो आइये अब हम उनसे जुडी कुछ कहानियों को पढ़ते हैं और देखते हैं की आखिर किस प्रकार की बुद्धिमत्ता तेनाली रामा के पास थी ?

विदेशी व्यापारी और तेनाली की परीक्षा 

विजयनगर राज्य के मंत्रियों के बुद्धिमानी का चर्चा विदेशो तक होने लगा था। ऐसी चर्चा सुनने के बाद एक बार विजयनगर में एक विदेशी व्यापारी आया। वह राजा कृष्णदेव के दरबार के मंत्रियों की बुद्धिमत्ता की परीक्षा लेना चाहता था। पूछते-पूछते वह राजा कृष्णदेवराय के दरबार में पहुँचा। 

वँहा पहुँच कर उसने राजा कृष्णदेव से कहा -'महाराज मैंने आपके मंत्रियों के बारे में बहुत कुछ सुन रखा हैं की उनके जैसा बुद्धिमान और चतुर मंत्री दूसरे राज्य में नहीं हैं इसीलिए मैं उनकी परीक्षा लेना चाहता हूँ और ये जानना चाहता हूँ की आखिर वो कितने बुद्धिमान हैं ?' 

राजा कृष्णदेव ने हाँ कह दिया और कहा की ठीक हैं आप मेरे मंत्रियों की परीक्षा ले सकते हैं। फिर उस विदेशी व्यापारी ने राजा को तीन गुड़िया दिया जो एकदम एक जैसी दिखती थी और कहा की मैं चाहता हूँ की आप ये तीनो गुड़िया अपने मंत्रियों के दे दीजिये और उनसे इन तीनो गुड़ियों के बिच में क्या अंतर हैं वो खोज के बताये मैं 30 दिन बाद फिर आऊँगा। आपके मंत्रियों के पास 30 दिन का समय हैं। 

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इतना कहकर विदेशी व्यापारी चला गया। राजा ने अपने सभी मंत्रियों को बुलाया और उनको तीनो गुड़िया देकर उनमे अंतर बताने को कहा। कई दिन बीत गए लेकिन किसी भी मंत्री को उन तीनो गुड़ियों में कोई भी अंतर का पता नहीं लग सका।  वें तीनो गुड़ियों में कोई अंतर नहीं खोज पाए और उन्होंने राजा को गुड़िया लौटा दिया। 

Tenali Ramakrishna
                                                                    Tenali Ramakrishna

तेनाली रामा की परीक्षा : About Tenali Raman In Hindi

राजा ने अभी तक तेनाली रामा को इन गुड़ियों के अंतर के बारे में नहीं पूछा था। तेनाली रामा को भी दरबार में बुलाया गया और तीनो गुड़िया देकर उनमे अंतर खोजने को कहा गया। तेनाली गुड़ियों को लेकर चले गए। 

30 दिन बाद वह विदेशी व्यापारी फिर से विजयनगर आया और राजा कृष्णदेवराय से गुड़ियों अंतर के बारे में पूछा ? राजा ने तेनाली को बुलाया और उससे पूछा की इन गुड़ियों में क्या अंतर तुमने खोजा हैं बताओ ? तेनाली रामा ने कहा इन तीनो गुड़ियों में एक गुड़िया बहुत अच्छी हैं, दूसरी ठीक-ठाक हैं और तीसरी तो बहुत ही ख़राब हैं। दरबार में कौतुहल बढ़ गया। व्यापारी ने आश्चर्य से पूछा की तुम ऐसा कैसे कह सकते हो की ये गुड़िया अच्छी हैं ये नहीं जबकि दिखने में हरतरफ से तीनो एक समान हैं। 

फिर तेनाली ने एक गुड़िया को हाथ में उठाया और उसके कान में एक तार डाल दिया जो मुँह से निकला। फिर तेनाली ने कहा यह गुड़िया इधर से सुनेगी उधर बोलेगी झगड़ा लगाएगी  इसीलिए ये बहुत ही ख़राब हैं। दूसरी गुड़िया के कान में  तार डाला तो सीधा उसके दूसरी कान से निकल गया। यह गुड़िया इधर से सुनेगी उधर से निकाल देगी इसीलिए यह गुड़िया ठीक-ठाक हैं।  

तीसरी गुड़िया के कान में तार डाला तो वह तार कही से भी नहीं निकला। तो तेनाली रामा ने फिर कहा यह गुड़ियाँ बहुत अच्छी हैं क्युकी ये जो भी सुनती हैं उसको अपने अंदर ही रखती हैं उसपर सोचती हैं विचार करती हैं और बेवजह बक-बक  भी नहीं करती हैं। 

तेनाली रामा की जय-जयकार- About Tenali Raman In Hindi

तेनाली रामा की ऐसी बुद्धिमानी देखकर पूरा दरबार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। पुरे दरबार में तेनाली रामा की जय-जयकार होने लगी।  राजा कृष्णदेवराय आपने मंत्री के बुद्धिमानी के देखकर बहुत प्रसन्न हुवे उन्होंने तेनाली को खूब सारा धन इनाम में दिया। विदेशी सेठ को भी विस्वास हो गया की सही में विजयनगर के मंत्री बहुत ही बुद्धिमान और चतुर हैं।    

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तो आपलोगो की तेनालीरामा की बुद्धिमानी कैसी लगी ? अपनी प्रतिक्रिया कमेंट में देने की कृपा जरूर करे। इससे हमें बहुत प्रेरणा मिलेगी और हम ऐसे ही हमेशा खोज-खोज के प्रेरक कहानियाँ आपके लिए लेकर आते रहेंगे। रामलिंगा के जीवन से जुडी ऐसी सैकड़ो कहानियाँ हैं जो सभी सत्य कहानियाँ हैं। ये कहानियाँ शिक्षा से ओतप्रोत हैं तेनाली की कहानियाँ हमें जीवन में सही राह चुनने में बहुत ही मदद करती हैं।

तो चलिए ऐसे ही कहानियों के बिच आपको तेनाली रामा की एक और छोटी सी कहानी सुनाते हैं की कैसे उन्होंने बड़ी चलाकी से हँसते-हँसाते विजयनगर को चोर गृहमंत्री का पर्दाफास किया इस कहानी को अंत तक पढ़ने के बाद हमें पूरा विस्वास हो जायेगा की तेनाली रामा सचमुच में एक विलक्षण प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे। तो चलिए शुरू करते हैं जादुई कुएँ की कहानी -


Hindi Story Tenali Raman


तेनाली रामा की कहानियाँ - जादुई कुएँ 

गर्मी का दिन आने वाला था। सूरज का ताप धीरे-धीरे बढ़ रहा था। विजयनगर के राजा कृष्णदेवराय ने गर्मी को देखते हुवे पुरे विजयनगर में जगह-जगह कुआँ खोदने का आदेश दिया ताकि कोई भी मनुष्य या जानवर प्यासा न रहे। जल सभी जगह सर्व-सुलभ बनाने के लिए उन्होंने गृहमंत्री को कुएँ खोदवाने का आदेश जारी किया। 

कुँवा खोदने के लिए बहुत बड़ी धन राशि राजा के द्वारा इस कार्य को संपन्न करने के लिए दिया गया। गृहमंत्री ने कुँवा खोदवाने का कार्य प्रारम्भ कर दिया। विजयनगर के हर नगर-गाँव में यह कार्य होने लगा। एक दिन राजा ने सोचा  क्यों न खुद चल कर कुँवा का निरिक्षण करते हैं की सब ठीक से कार्य हो रहा हैं की ? 

फिर राजा कृष्णदेव अपनी रथ पर सवार होकर कुँवा देखने चल दिए। गृहमंत्री ने अपने कार्य की खूब बड़ाई की और राजा को कुछ जगह कुँवा का भ्रमण कराया। राजा गृहमंत्री के कार्य से और बातों से संतुष्ट होकर वापस महल में आ गये। 

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इसके कुछ दिन बाद ही कुछ लोग तेनाली रामा के पास गए और उन्होंने गृहमंत्री की चोरी के बारे में तेनाली रामा को बताया और उनसे सहायता की माँग की। रामलिंगा ने उन्हें आश्वस्त किया आपलोग चिंता ना कीजिये गृहमंत्री के चोरी का खुलासा जरूर होगा राजा तक यह बात जरूर पहुँचेगी और चोर गृहमंत्री को अवश्य दंड मिलेगा। लोग घर जाइये कल सुबह-सुबह हम दरबार में चलेंगे। 

चोरो ने कुएँ चुरा लिए  Hindi Story Of  Tenali Raman In Hindi

अगली सुबह-सुबह ही तेनाली रामा राजा कृष्णदेवराय के दरबार में जा पहुँचे। राजा ने कहा 'कहो तेनाली कैसे आना हुआ ?' तेनाली ने जवाब दिया महाराज हमारे राज्य में कुछ चोर घूँस आये हैं और वो हमारे कुएँ चुरा रहे हैं। राजा को बड़ा आश्चर्य हुआ उन्होंने कहा -'क्या बात कर रहे हो तेनाली कोई चोर कुँवा कैसे चुरा सकता हैं ? कुँवा भी कोई चोरी होनी वाली चीज हैं ?'

रामाकृष्णा ने बड़े भोलेपन से कहा - 'महाराज मैं सत्य कह रहा हूँ चोर कुँए चुरा रहे हैं।' दरबार में उपस्थित सभी लोग जोर से हसने लगे। हँसी शांत होने पर तेनाली पुनः कहा 'महाराज! मैं जानता था आप विस्वास नहीं करेंगे इसीलिए मैं अपने साथ कुछ गाँव वालो को लेकर आया हूँ वो लोग आपको सबकुछ विस्तारपूर्वक बतायेंगे।'

राजा ने बाहर खड़े गाँव वालों को बुलाया और उनसे साड़ी बात पूछी। गाँव वालो ने कहा की महाराज ! गृहमंत्री द्वारा बनाये सभी कुँवें समाप्त हो गए चाहे तो आप खुद चलकर देख सकते हैं। राजा ने गाँव वालो की बात मान ली तथा गृहमंत्री को तुरंत दरबार में उपस्थित होने का आदेश दिया। 

राजा ने गृहमंत्री को लेकर तथा कुछ दरबारी, तेनाली रामा और गाँव वाले कुओं का निरिक्षण करने चल दिए। राजा ने देखा की विजयनगर के आस-पास के गावो और नगरों में कुओं का निर्माण नहीं हुआ हैं। उन्होंने तुरंत गृहमंत्री को उसकी चोरी के लिए गृहमंत्री के पद से निष्काषित कर दिया। और तेनाली रामा की प्रंशसा की और तुरंत बचे रह गए गावो-नगरों में कुआ खोदने का आदेश दिया। 


चोर पकड़ा गया। About Tenali Raman In Hindi

तो इस तरह से तेनाली रामा ने बड़ी ही आसानी से बेईमान मंत्री को सबक सिखाया और प्रत्येक गावो में कुआ खुदवाया साथ ही विजयनगर के खजाने का धन भी बचाया। 

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About Tenali Raman In Hindi | तेनाली रामा जीवन परिचय About Tenali Raman In Hindi | तेनाली रामा जीवन परिचय Reviewed by Hindi Story Of on December 15, 2019 Rating: 5

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