Hindi Short Story With Moral | सेठ को शिक्षा

Hindi Short Story With Moral - कहानियाँ हमारे जीवन पर बहुत प्रभाव डालती हैं। कई Short Story in Hindi हमें हँसाती है तो कई रुलाती भी हैं वही कुछ कहानी हमें शिक्षित भी करती हैं तो कुछ हमें प्रेरणा भी देती हैं। Hindi Short Story Moral


 इस Hindi Short Story With Moral की श्रंखला में आज हम एक अहंकारी सेठ की दिलचस्प कहानी पढ़ेंगे की कैसे एक संत ने उसे शिक्षा दी और उसके अहंकार को तोड़ दिया। 

Hindi Short Story With Moral - सेठ को शिक्षा

 प्राचीन समय की बात हैं। ईश्वरपुर नगर में एक बहुत ही धनी सेठ रहता था। उसके घर के समीप ही एक नदी बहती थी। वह सुबह जल्दी उठकर नदी में स्नान करके घर आकर नित्य-नियम करता था। ऐसे वह रोजाना नहाने नदी पर आता था। एक बार एक सिद्ध संत विचरते हुए वहाँ घाट पर आ गये। 

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सेठ नदी में नहाकर उस संत के समीप से ही गुजरा संत ने सेठ को देखकर कहा- 'सेठ ! राम-राम !' ऐसे दो-तीन बार बोलने पर भी सेठ ने 'राम-राम' नहीं बोला। सेठ ने समझा की कोई भिखमँगा हैं। इसीलिए संत से कहने लगा-- 'हट ! हट !' चल हट यहाँ से।' संत ने देखा की अभिमान बहुत बढ़ गया हैं, भगवान् का नाम भी नहीं लेता। मैं तो भगवान् का नाम लेता हूँ और यह हट-हट कहता हैं।   Hindi Short Story With Moral

 इन धनी आदमियों को वहम रहता हैं की इनसे कोई कुछ माँग लेगा, कुछ ले लेगा। इसीलिए धनी लोग सबसे डरते हैं। वे गरीब से, साधू से, ब्राह्मण से, राज्य से, चोरों से, डाकुओं से डरते हैं। अपने बेटा-पोता ज्यादा हो जायँगे तो धन का बटवारा हो जायेगा - ऐसे भी डर लगता हैं उन्हें।    

बहुरुपिया सेठ Hindi Short Story Moral

 संत ने सोचा की इसे ठीक करना होगा और उन्होंने एक तरकीब सोची। संत ने ठीक सेठ जैसा वेष धारण किया और सेठ बनकर उसके घर पर चले गये। दरवाजे पर खड़े दरबान ने कहा की 'आज आप जल्दी कैसे आ गये ?' तो सेठ के वेष में संत ने कहा की 'एक बहुरुपिया मेरा रूप धर के वहाँ आ गया था, मैंने समझा की वह घर पर जाकर कोई गड़बड़ी नहीं कर दे। इसीलिये मैं जल्दी घर आ गया। तुम सावधानी रखना, वह आ जाय तो उसे भीतर मत आने देना।'   सेठ घर पर जैसा नित्य-नियम करता था, वैसे ही सेठ संत भजन-पाठ करने लग गये। 

अब असली सेठ सदा की तरह धोती और लोटा लिये आया तो दरबानने रोक दिया।' कहाँ जाते हो ? हटो यहाँ से ! सेठ बोला- 'तूने भाँग पी ली हैं क्या ? नशा आ गया हैं क्या ? क्या बात हैं ? तू नौकर हैं मेरा, और मालिक बनता हैं।' दरबानने कहा- 'हट यहाँ से, नहीं जाने दूँगा भीतर।' Hindi Short Story Moral

 सेठ ने अपने पुत्रो को आवाज दी- 'आज इसको क्या हो गया हैं ?' तो उन्होंने कहा की- 'बाहर जाओ, भीतर मत आना।' बेटे भी ऐसे ही कहने लगे। Hindi Short Story With Moral

जिसको पूछे, वे ही धक्का दें। सेठ ने देखा की क्या तमाशा हुआ भ ? मुझे दरवाजे के भीतर भी नहीं जाने देते हैं। सेठ परेशान होकर बेचारा ईधर-उधर घूमने लगा।   अब क्या करें ? सोचते-सोचते सेठ ने राजा के शरण में जाने का निर्णय लिया। सेठ की जब कही नहीं चली तो उसने राज्य में जाकर रिपोर्ट दी की इस तरह आफत आ गयी। वे सेठ राज्य के बड़े मान्य आदमी थे। 


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असली नकली की परीक्षा

राजा ने उनको जब इस हालत में देखा तो कहा- 'आज क्या बात हैं ? लोटा, धोती लिये कैसे आये हो ?'   इस पर सेठ ने राजा से कहा की - 'कैसे-कैसे क्या, महाराज ! बहुत मुसीबत आन पड़ी हैं। मेरे घर में एक बहुरुपिया बनकर घुस गया और मुझे निकाल दिया बाहर।' राजा ने कहा - 'सेठ ! तुम चार घोड़ो की बग्घी में आया करते थे, आज आपकी यह दशा।' राजा ने अपने आदमियों को सेठ के घर भेजा और सारी वस्तु-स्थति का पता लगाकर आने का आदेश दिया।   Hindi Short Story Moral


राजा के आदेश पर जब सैनिक सेठ के घर पहुँचें तो घरवालों ने कहा की- 'अच्छा तो वह बहुरुपिया राज्य में पहुँच गया !' बिलकुल नकली आदमी हैं वह। हमारे सेठ तो भीतर विराजमान हैं।' राजा से जाकर कह दो 'जो उनके पास गया हैं वो सेठ का बहुरिपियाँ हैं असली सेठ घर पर हैं।' सैनिको ने हूबहू सब हाल राजा को सुना दी। स्थिति बहुत गंभीर हो गई। राजा ने उस सेठ को बुलाने का आदेश दिया।   
संत बने सेठ ने चार घोड़ो की बग्घी लगाकर पुरे ठाट-बाट से जैसे जाते थे, वैसे ही पँहुचे और बोले - 'अन्नदाता ! क्यों याद फ़रमाया, क्या बात हैं ?'   राजा का भी दिमाग चकरा गया की दोनों एक-से दिख रहे है। पता कैसे लगे की कौन असली सेठ हैं ? मंत्रियों से पूछा तो वे बोले - 'साहब, असली सेठ का कुछ पता नहीं लगता।' तब राजा ने उन दोनों से पूछा- 'आप दोनों में असली और नकली कौन हैं ?' तो कहा ' परीक्षा कर लो।' सेठ बने हुये संत ने कहा 'बही लाओ। बही में जो लिखा हुआ हैं, वह हम बता देंगे।' Hindi Short Story With Moral


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बही मँगायी गई। जो सेठ बने हुए संत थे, उन्होंने बिना देखे ही कह दिया कि 'अमुक-अमुक वर्ष में इतना खर्चा लगा, इतना घी लगा, अमुक के विवाह में इतना खर्चा हुआ। वह हिसाब अमुक बही में, अमुक जगह लिखा हुआ हैं।' वह सब-का-सब मिल गया। सेठ बेचारा देखता ही रह गया। उसको इतना याद नहीं था। इससे यह सिद्ध हो गया की वह सेठ नकली हैं। राजा ने फिर उस सेठ की एक नहीं सुनी तथा झूठ बोलने के आरोप में असली सेठ को दंड देने का निश्चय किया लेकिन सेठ बने संत ने राजा से विनय कर के क्षमा दिला दीया। Hindi Short Story With Moral

अपने ऊपर आई विपत्ति से हताश हो कर सेठ वही पर नदी किनारे जा बैठा। वहाँ वही संत बैठे हुये थे। उस सेठ को देखकर संत ने कहा -'राम-राम !' तब उसकी आँख खुली की यह सब इन संत का चमत्कार हैं। संत ने कहा तुम भगवान का नाम लिया करो, हरेक का तिरष्कार, अपमान मत किया करो। जाओ, अब तुम अपने घर जाओ।'    

सेठ ने हाथ जोड़ कर संत से क्षमा माँगा और पुनः कभी भी किसीका तिरस्कार, अपमान नहीं करने का सिख लिया। हमें इस कहानी से प्रेरणा मिलती हैं की हम सब एक हैं एक ही आत्मा सब में हैं फिर क्यों किसी का तिरस्कार, अपमान करें ? फिर वह सेठ सदा की तरह चुपचाप अपने घर आ गया। Hindi Short Story With Moral

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मेल की शक्ति : Short Story In Hindi

महादेव के पाँच पुत्र थे - शिवराम, शिवदास, शिवसहाय, शिवलाल और शिवपूजन। ये पांचो लडके परस्पर आपस में झगड़ा किया करते थे। छोटी-सी बात पर भी आपस में 'तू-तू'  'मैं-मैं' करने लगते और पटका-पटकी करने लगते।

महादेव अपने लडको के झगड़ों से बहुत ऊब गया था। उसने एक दिन उन्हें समझाने के विचार से पास बुलाया।  पहले से पतली-पतली सुखी पाँच टहनियों का उसने एक छोटा गट्ठर बना लिया था। पुत्रों से उसने कहा -'तुममे से जो इन टहनियों के गट्ठर को तोड़ देगा उसे एक रुपया पुरस्कार दिया जायेगा।' Hindi Short Story With Moral

पांचो लड़के झगड़ने लगे की गट्ठर को वे पहले तोड़ेंगे। उन्हें डर था की यदि दूसरा भाई पहले तोड़ देगा तो रुपया उसी को मिल जायेगा। महादेव ने कहा -'पहले सबसे छोटे भाई शिवपूजन  तोड़ने दो।'

शिवपूजन ने गट्ठर अपने हाथ में उठा लिया और जोर लगाने लगा। दाँत दबाकर, आँख मिचकर बहुत जोर उसने लगाया। माथे पर पसीने आ गए थे; किन्तु गट्ठर की टहनियाँ नहीं टूटीं। उसने गट्ठर अपने से ठीक बड़े भाई शिवसहाय को दे दिया। उसने भी जोर लगाया, पर तोड़ नहीं पाया।

इस प्रकार सब लड़कों ने बारी-बारी  गट्ठर लिया और खूब जोर-आजमाइश किया; किन्तु कोई उसे तोड़ने में सफल नहीं हुआ। महादेव ने गट्ठर खोलकर एक-एक टहनी सब लड़कों को दे दी। इस बार सभी ने पटापट तोड़ दिया।

Hindi Short Story With Moral  

सभी लड़को को एक-एक टहनी आसानी से तोड़ते हुवे देखकर अब महादेव बोला - 'देखा! ये टहनियाँ जबतक एक साथ थीं तुममें से कोई उन्हें तोड़ नहीं सका और जब ये अलग-अलग हो गयीं तो तुमने सरलता से सबको तोड़ डाला।  Hindi Short Story With Moral

इसीप्रकार यदि तुमलोग आपस में झगड़ते और अलग रहोगे तो दूसरे लोग तुम लोगों को तंग करेंगे और दबा लेंगे। लेकिन यदि तुमलोग परस्पर मेल से रहोगे तो कोई तुमसे शत्रुता करने का साहस ही नहीं करेगा।' 

महादेव के सभी पांचों लड़को पर इस घटना का बहुत  प्रभाव पड़ा उन्होंने अपने पिताजी द्वारा दी गई सिख को समझ लिया तथा उसी दिन से वे आपस में झगड़ना छोड़ दिया। वे मेल से रहने लगे। 

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Hindi Short Story With Moral | सेठ को शिक्षा Hindi Short Story With Moral | सेठ को शिक्षा Reviewed by Hindi Story Of on December 08, 2019 Rating: 5

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