Hindi Story Of Thirsty Crow | प्यासे कौवे की कहानी

Hindi Story Of Thirsty Crow एक प्यासे कौवे की कहानी हैं। इस कहानी का मुख्य किरदार कौवा हैं जो प्यास से बहुत ही व्याकुल रहता हैं। Thirsty Crow Story In Hindi with Moral हम बचपन से ही इस कहानी को पाठ्यपुस्तकों में पढ़ते आ रहे हैं की कैसे कौवे ने अपनी सूझबूझ से अपनी प्यास को बुझाता हैं और अपना प्राण बचाता हैं।


बालक हो, युवा हो अथवा वृद्ध हो, सबकी कहानियाँ सुनने में स्वाभाविक रूचि रहती हैं। समाज के उत्थान और पतन में कहानियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। संतो के मुख से निःसृत कहानियाँ जहाँ समाज में अमृत (सद्गुण-सदाचार) की गंगा बहाती हैं। ऐसे ही उपदेशप्रद कहानियों की शृंखला में आज हम एक कौवे की प्रेरणादायी कहानी के बारे में पढ़ेंगे।


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हमारे ऋषि-मुनियों का साफ़ उपदेश हैं की ज्ञान जहाँ कही से भी मिले उसको ग्रहण करते रहना चाहिए। हमें हमेशा प्रेरणादायी कहानियों और प्रसंगो की खोज में रहना चाहिए। प्रेरणादायी कहानियों की खोज में यह प्यासे कौवे की कहानी एक पड़ाव हैं जो हमें बहुत ही सिख देती हैं आइये तो शुरू करते हैं-

Hindi Story Of Thirsty Crow -

एक बार की बात है, गर्मी का महीना था और चिलचिलाती धुप पड़ रही थी। एक कौवे को बहुत जोर से प्यास लगी थी। कौवा पानी की तलाश में इधर-उधर घूम रहा था। प्यास की व्यग्रता ने उसकी बेचैनी और बढ़ा दी थी। पानी की खोज में वो कभी यहाँ तो कभी वहाँ बावलो की तरह उड़ रहा था।

कड़ी धुप की वजह से उसका गाला भी लगातार सूखता जा रहा था। प्यास के कारन कौवा को कुछ समझ नहीं आ रहा था। कौवे को तो बस पानी की धुन सवार हो गई थी वो अपने पुरे आत्म बल से पानी की खोज में लगातार प्रयास रत रहा।

पानी की खोज में कौवा एक बार फिर पुरे जोश के साथ उन्मुक्त गगन में उड़ान भर दी। उसने निश्चय कर लिया था की अब कितना ही दूर क्यों न जाना पड़े आज वो पानी की खोज कर के ही रहेगा। प्यास और बेचैनी के कारन कौवे की शक्ति भी धीरे-धीरे जवाब दे रही थी।

बार-बार पानी की खोज में इधर-उधर उड़ने की वजह से कौवा अब थक भी रहा था। मृत्यु उसे अब निकट दिख रही थी प्यास की तीव्रता की वजह से वो मूर्क्षित हो रहा था। उसके पंख भी अब जवाब दे रहे थे। कौवा अब और उड़ाना नहीं चाहता था तभी उसे एक पेड़ दिखाई दिया और उसके पास एक गड्ढा जैसा दिखा।

कौवे को लगा की शायद कुआँ हैं। आशा की किरण देख कर कौवे की जान में जान आई वो बड़ी तेजी से उस पेड़ की तरफ उड़ चला। उसे लगा की अब पानी मिल जायेगा और उसकी प्यास बुझ जाएगी। पानी की आश में कौवा उस पेड़ की निचली टहनी पर जा बैठा और उस गड्ढे पर नजर गड़ा दिया।

Thirsty Crow Story In Hindi with Moral

वह गड्ढा नहीं कुआँ ही हैं यह जान कर तो उसको ख़ुशी हुई लेकिन कौवे की आशा तब धराशाही हो गई जब उसने उस कुँवे को जल की जगह प्लास्टिक और विभिन्न प्रकार के कचड़े से भरा देखा साथ ही उस कुँवे के आस पास फैले कई चिड़ियों और कौंवों का कंकाल देख कर वह सन्न रह गया।

कुँवे के प्लास्टिक से भरे होने के कारण प्यास से मरे चिड़ियों को देख कर कौवे को बहुत ही निराशा हुई उसे अब अपना अंत भी निकट ही दिखने लगा। कौवे को अपने बचपन का वो दिन याद आने लगा की कैसे उसकी माँ हमेशा गर्मियों के दिन में उसको लेकर इस कुँवे पर आती थी और वो दिन भर इस कुँवें की पानी में अठखेलियाँ खेलते और खूब शीतल जल पीते। अभी ज्यादा दिन भी तो नहीं बीते मनुष्यों ने अब जानवरो की चिंता करना छोड़ दिया हैं।

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बचपन की यादें सोचते-सोचते कौवें की आँखों में आशु आ गए अपने अंत समय में उसे अपनी माँ याद आने लगी। तभी कौवे के अंदर पुनः एक क्रांति जगी माँ की याद ने उसे पुनः जैसे जीवित कर दिया। पूरी तरह से हार मान चूका कौवा अब हार स्वीकार करने के मूड में नहीं था पूरी शक्ति से उसने एक बार फिर अपने पँखों को फडफ़डायां और पानी की खोज में दुबारा निकल गया।

Moral Story In Hindi

उड़ते उड़ते उसे कुछ घड़ा रखा हुआ दिखाई दिया कौवे को एक बार फिर आश जगी और वो अपनी प्यास बुझाने के लिए उन घड़ो की तरफ तेजी से उडाता चला गया। उन घड़ों के पास पहुँच कर वो उनमें से सबसे बड़े घड़े पर जा बैठा। उसने जब घड़ा के अंदर झाँक के देखा तो पानी में उसे अपनी परछाई दिखी। अपनी परछाईं को देख कर कौवा आश्वश्त हो गया की उसे पानी मिल गया उसकी जान में जान आई।

परम संतोष के साथ उसने जैसे ही अपना चोंच घड़े में पानी पिने के लिए डाला तो फिर उसे निराशा हाथ लगी चुकी घड़ा बड़ा था इसीलिए उसका चोंच पानी तक नहीं पहुँच रहा था। घड़ा में पानी निचे ही था। अब कौवे के सामने एक नई समस्या ने जन्म ले लिया था।

कौवा अगल-बगल के घड़ो के ऊपर कूद-फान करने लगा की कही इनमें पानी मिल जाए लेकिन वहाँ जितने भी घड़े थे उन सबमे सिर्फ बड़े वाले घड़े में ही पानी था वो पानी निचे था। कौवा बड़ी उधेड़-बुन में फंस गया। यदि वो घड़े को किसी तरह गिरा देता हैं तो पानी निचे गिर जाने का डर हैं। इतनी खोज के बाद मिले पानी को कौवा किसी भी हाल में नष्ट नहीं करना चाहता था।

कौवे की सूझ-बुझ

वह पानी को घड़े में ऊपर लाने की तरकीब सोचने लगा तथा घड़े के आस-पास मडराने लगा। उसे आस-पास पड़े कंकड़-पत्थर दिखे। इन पत्थर के टुकड़ों के देख कर कौवे को एक तरकीब सूझी और वो तेजी से एक कंकड़ के पास गया और उसे अपनी चोंच में दबा के घड़े में डाल दिया। फिर उड़ के दुबारा दूसरे कंकड़ के पास गया और उसको भी अपनी चोंच में दबा के घड़े में डाल दिया।
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Thirsty Crow Story In Hindi with Moral



वह बार-बार इस प्रक्रिया को दोहराने लगा साथ ही धीरे-धीरे घड़ा में पानी ऊपर आने लगा। कौवे ने एक बार फिर घड़े में अपनी चोंच डाली उसने देखा की अभी भी बढ़िया से उसका चोंच पानी तक नहीं पहुँच पा रहा हैं लेकिन उसे ख़ुशी हुई की पानी पहले से अब ऊपर आ गया हैं वो फिर तेजी से दूसरी पत्थरो की तरफ लपका और अपनी चोंच में दबा के घड़े में डालना पुनः शुरू कर दिया।

कुछ देर बाद पानी ऊपर आ गया और कौवे की मेहनत रंग लाई वो घड़े पर जा चढ़ा और आसमान की तरफ देख कर अपनी माँ को धन्यवाद दिया और फिर उसने पानी पिया और अपनी प्यास बुझाई।

प्यासे कौवे कहानी की शिक्षा

और इस तरह कौवे ने अपनी सूझबूझ और लगन से अपना प्राण बचाया और अपनी प्यास बुझाई। प्यासे कौवे के इस कहानी से हमें बहुत ही सिख मिलती हैं। यह एक प्रेरक कहानी हैं जिससे हमें किसी भी विषम परिस्थिति में हार न मानने की प्रेरणा मिलती हैं साथ ही अपनी सूझ-बुझ से काम लेने की सिख मिलती हैं।


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Hindi Story Of Thirsty Crow एक प्यासे कौवे की कहानी हैं। Thirsty Crow Story In Hindi with Moral कहानी एक प्रेरक कहानी हैं।

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Hindi Story Of Thirsty Crow | प्यासे कौवे की कहानी Hindi Story Of Thirsty Crow | प्यासे कौवे की कहानी Reviewed by Hindi Story Of on December 10, 2019 Rating: 5

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