Simple Hindi Story for Child | भगवान् की बड़ी कृपा हो गयी

Simple Hindi Story for Child कहानियाँ समाज निर्माण या व्यक्तित्व निर्माण में बहुत सहायक होती हैं। Hindi Story For Child With Moral उम्र से ऊपर उठ कर मनुष्य के सभी वर्गो को कहानी सुनने या पढ़ने में स्वाभाविक रूचि रहती हैं।

समाज के उत्थान और पतन में कहानियाँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। प्रेरक कहानियाँ जहाँ समाज में संस्कार और संस्कृति का निर्माण करती हैं वही सांसारिक उपन्यास, सिनेमा, टेलीविज़न पर आजकल प्रसारित अधिकतर कहानियाँ समाज में विष (दुर्गुण-दुराचार) की सरिता बहती हैं।

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बालक की प्रथम गुरु माँ भी कहानियों के माध्यम से ही उसके कोमल हृदय में अच्छे संस्कार जाग्रत करती हैं, जो उसके भावी जीवन को उन्नत बनाने में सहायक हैं। हम रोज आपके लिए और आपके बच्चो के लिए प्रेरक कहानियाँ, उपदेशप्रद कहानियाँ, आदर्श कहानियाँ ले के आते हैं जिससे की आजकल के समाज में प्रेम, दया, संस्कार और संस्कृति की गंगा बहाया जा सके।

Simple Hindi Story for Child | भगवान् की  बड़ी कृपा हो गयी
Simple Hindi Story for Child | भगवान् की  बड़ी कृपा हो गयी 


प्रेरक कहानियों की सूचि में आज हम आपको एक ऐसे मंत्री की कहानी सुनाएंगे की कैसे उसने अपने भक्ति से अपनी और राजा की जान बचाई। इस कहानी से हमें पता चलता हैं की यदि हम पूरी ईमानदारी पूर्वक ईश्वर में विश्वास रख के कोई कर्म करना चाहिए और यही सुख, शांति और अंत में मुक्ति का एकमात्र साधान हैं।

Simple Hindi Story for Child 

एक राजा था।  उसका मंत्री भगवान् का बहुत बड़ा भक्त था तथा भगवान् पर बहुत विस्वास करता था। उस मंत्री की एक आदत थी जब भी कोई बात होती तो वह यह कहता 'भगवान् की बड़ी कृपा हो गयी !' एक दिन राजा के बेटे की मृत्यु हो गई। मृत्यु का समाचार सुनते ही मंत्री बोल उठा - 'भगवान् की बड़ी कृपा हो गयी !' यह बात राजा को बुरी तो लगी, पर वो चुप रहा।


कुछ दिनों के बाद राजा की पत्नी की भी मृत्यु हो गयी। मंत्री ने फिर समाचार सुनते ही कहा -'भगवान् की बड़ी कृपा हो गयी !' इस बार राजा को बहुत गुस्सा आया, पर उसने गुस्सा पि लिया, कुछ नहीं बोला। एक दिन राजा के पास एक नयी तलवार बनकर आयी। राजा अपनी अंगुली से तलवार की धार का जायजा लेने लगा। तलवार की धार बहुत तेज थी जिस कारन राजा की उंगली झट से कट गयी।


मंत्री पास में ही खड़ा था। राजा की कटी हुयी उँगली देख कर बोल पड़ा - 'भगवान् की बड़ी कृपा हो गयी !' इस बार राजा का गुस्सा बाहर आ गया तथा इस बार वह शांत रहने वाला नहीं था। उसने तुरंत मंत्री को राज्य छोड़ के बहार निकल जाने का आदेश जारी कर दिया और कहा की मेरे राज्य में अन्न-जल ग्रहण मत करना। मंत्री बोला - 'भगवान् की बड़ी कृपा हो गयी !' मंत्री अपने घर पर भी नहीं गया, साथ में कोई वस्तु भी नहीं ली और राज्य के बाहर चला गया।


राजा की बली 

कुछ दिन बीत गये। एक बार राजा अपने साथियों के साथ शिकार खेलने के लिए जंगल गया। जंगल में एक सुवर का पीछा करते-करते राजा बहुत दूर घने जंगल में निकल गया। उसके सभी साथी पीछे छूट गए। वहाँ जंगल में डाकुओ का एक दाल रहता था। उस दिन डाकुओं ने काली देवी को एक मनुष्य की बलि देने का विचार किया था। संयोग से डाकुओं ने राजा को देख लिया। उन्होंने राजा को पकड़ कर बांध दिया।


अब उन्होंने बलि देने की तैयारी शुरू कर दी। जब पूरी तैयारी हो गयी, तब डाकुओं के पुरोहित ने राजा से पूछा 'तुम्हारा बेटा जीवित है ?' राजा दुखी मन से कहा  -'नहीं ! वह मर गया हैं।' पुरोहित ने कहा इसका ह्रदय तो जला हुआ हैं।' पुरोहित ने फिर पूछा - 'तुम्हारी पत्नी जीवित हैं ?' राजा बोला - 'नहीं ! वो भी मर चुकी हैं।' पुरोहित ने कहा ये तो पत्नी बिना अधूरा हैं। अतः यह बलि के योग्य नहीं हैं।' परन्तु हो सकता हैं की यह मरने के भय से झूठ बोल रहा हो।

पुरोहित ने राजा के शरीर की जाँच करने के कहा। दूसरे डाकुओ ने राजा के शरीर की जांच करनी प्रारम्भ कर दी। तभी एक डाकू ने कहा की इसका उंगली कटा हुआ हैं यह अंग-भंग हैं। फिर पुरोहित बोला - अरे ! यह तो पूर्ण अंग वाला भी नहीं हैं, यह मानव बलि योग्य नहीं हैं ! छोड़ दो इसको ! पुरोहित का आदेश पाकर डाकुओं ने उसको छोड़ दिया।


मंत्री की खोज Simple Hindi Story for Child 

राजा अपने घर लौट आया।  लौटते ही उसने अपने आदमियों को आज्ञा दी की हमारा मंत्री जहाँ भी हो, उसको तुरंत ढूँढ़कर हमारे पास लाओ। जबतक मंत्री वापस नहीं आएगा, तबतक मैं अन्न ग्रहण नहीं करूँगा। राजा के आदमियों ने मंत्रियों को ढूंढ लिया और उससे तुरंत तुरंत राजा के पास वापस चलने की प्रार्थना की। मंत्री ने कहा - 'भगवान् की बड़ी कृपा हो गयी।'

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Simple Hindi Story for Child | भगवान् की  बड़ी कृपा हो गयी
Simple Hindi Story for Child | भगवान् की  बड़ी कृपा हो गयी 


मंत्री राजा के सामने उपस्थित हो गया। राजा ने बड़े आदरपूर्वक मंत्री को उचित स्थान पर बैठाया और भूल पर पश्चाताप करते हुवे जंगलवाली घटना सूना कर कहा की 'पहले मैं तुम्हारी बातो को समझा नहीं। अब समझ में आया की भगवान् की मेरे ऊपर कितनी कृपा थी ! भगवान् की कृपा से अगर मेरी ऊँगली नहीं कटी होती तो उस दिन मेरा गाला काट गया होता।

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परन्तु जब मैंने तुम्हे राज्य से निकल दिया, तब तुमने कहा था की 'भगवान् की बड़ी कृपा हो गयी ' बल्कि मैंने तो तुम्हे बिना अन्न-जल ग्रहण किये राज्य से निष्काषित कर दिया था। यह बात मेरे समझ में आई इसमें तो मै कही भी तुम्हारे ऊपर भगवान् की कृपा नहीं देख पाया।  मंत्री बोला - 'महाराज, जब आप शिकार करने गए, तब मैं भी आपके साथ जंगल में जाता। आपके साथ मैं भी जंगल में बहुत दूर निकल जाता; क्युकी मेरा घोडा आपके घोड़े से काम तेज नहीं हैं।


डाकू लोग आपके साथ मुझे भी उठा ले जाते। आप तो उंगली कटी होने के कारन बच जाते लेकिन डाकू लोग आपकी जगह मेरा गला काट देते और मेरी बलि चढ़ा देते। इसीलिए भगवान् की कृपा से मई आपके साथ नहीं था। राज्य से बाहर था; अतः मरने से बच गया। अब मैं पुनः अपनी जगह पर आ गया हूँ। यह भगवान् की कृपा ही तो हैं।


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Simple Hindi Story for Child कहानियाँ समाज निर्माण या व्यक्तित्व निर्माण में बहुत सहायक होती हैं। Hindi Story For Child With Moral ऐसी कहानियो का प्रचार-प्रसार होना चाहिए।
Simple Hindi Story for Child | भगवान् की बड़ी कृपा हो गयी Simple Hindi Story for Child | भगवान् की  बड़ी कृपा हो गयी Reviewed by Hindi Story Of on December 11, 2019 Rating: 5

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