Hindi Kahani For Kids | पिता और पुत्र

Hindi Kahani For Kids | पिता और पुत्र
Hindi Kahani For Kids | पिता और पुत्र 
Hindi Kahani For Kids - छोटे-छोटे बच्चो का कहानियों से एक अलग ही स्नेह होता हैं। प्रेरक कहानियों से हमारे बालक-बालिकाओं को जीवन निर्माण में उत्तम प्रेरणा प्राप्त होती हैं। Hindi Story For Child कहानियाँ समाज निर्माण का कार्य भी करती हैं। शिक्षाप्रद और आदर्श कहानियाँ समाज में प्रेम, दया, शांति और आपसी सौहाद्र की गंगा बहाती है। Hindi Kahani For Kids

हमेशा से हम अपने समाज के बालक-बालिकाओ के लिए उपयोगी कहानियाँ खोज-खोज कर लाते रहते हैं ताकि हमारे बच्चो को अपने जीवन में उचित निर्णय लेने में सहयोग मिल सके। हमारे बच्चे शिक्षित, संस्कारित और देशभक्त बने। इसी श्रेणी में हम फिर से उपस्थित हैं कुछ प्रेरक कहानियों के साथ तो चलिए शुरू करते हैं।


पिता और पुत्र - Hindi Kahani For Kids

एक जवान पिता अपने छोटे पुत्र को गोद में लिये बैठा था। कहीं से उड़कर एक कौवा उनके सामने खपरैल पर बैठ गया। पुत्र ने पिता से पूछा - 'यह क्या हैं ?' पिता 'कौआ हैं।' पुत्र ने फिर पूछा - 'यह क्या हैं ?' पिता ने फिर कहा - 'कौआ हैं।' पुत्र बार-बार पूछता -था  'क्या हैं ?' पिता स्नेह से बार-बार कहता था - 'कौआ हैं।'

कुछ वर्षो पश्चात पुत्र बड़ा हुआ और पिता बूढ़ा हो गया। एक दिन पिता चटाई पर बैठा था। घर में कोई उसके पुत्र से मिलने आया। पिता ने पूछा - 'कौन आया हैं ?' पुत्र ने नाम बता दिया। थोड़ी देर में कोई और आया और पिताने फिर पूछा। इस बार झल्लाकर पुत्र ने कहा -'आप चुपचाप पड़े क्यों नहीं रहते। आपको कुछ करना-धरना तो हैं नहीं। Hindi Kahani For Kids

कौन आया ? कौन गया ? यह टाँय-टाँय दिनभर क्यों लगाए रहते हैं।' पिता ने लम्बी साँस खींची। उसकी आँखे भर गयी और पुरानी याद आने लगी की कैसे उसका पुत्र बार-बार एक ही सवाल पूछता था और वह हर बार ख़ुशी-ख़ुशी जवाब देता था और आज वही पुत्र दो सवाल पूछ लेने पर झुंझला जा रहा हैं। 

पिता ने अपने पुत्र से कहा - 'मेरे एक बार पूछने पर तुम क्रोध करते हो और तुम सैकड़ो बार पूछते थे एक ही बात - यह क्या हैं ? यह क्या हैं ? मैंने कभी तुम्हे झिड़का नहीं। मैं बार-बार तुम्हे बताता - यह कौआ हैं यह कौआ हैं।'
पुत्र को अपने किये पर बहुत पछतावा हुआ उसने अपने पिता के पैर छू कर माँफी माँगी और दुबारा ऐसी गलती नहीं करने का वादा किया। 

Hindi Kahani For Kids गलती का एहसास 

पिता तो पिता होते हैं उन्होंने अपने पुत्र को गले लगा लिया और बोले पिता के लिए अपने पुत्र की सारी गलती माफ़ होती हैं। जो पुत्र अपने माता-पिता का तिरस्कार करने वाले होते हैं ऐसे लड़के बहुत बुरे होते होते हैं। आप सदा इस बात का ध्यान रखियेगा की माता-पिता ने हमारे पालन-पोषण में कितना कष्ट उठाया हैं और आपसे कितना स्नेह किया हैं। Hindi Kahani For Kids

गलती से भी अपने माता-पिता को दुखी नहीं करना चाहिए और नाही उनपर कभी भी क्रोध करना चाहिए। माता-पिता धरती पर साक्षात् ईश्वर के रूप हैं इन्हे दुःख देकर आप कभी भी सुखी नहीं हो सकते। माता-पिता का आशीर्वाद उनका सेवा करके प्राप्त करना चाहिए। उनके आशीर्वाद से हमें हर जगह सफलता मिलती हैं।  

तो दोस्तों, अभिभावकों, माताओ और बहनो आपको यह कहानी कैसी लगी अपनी प्रतिक्रिया कमेंट बॉक्स में जरूर देने का कष्ट करें। आपके प्रतिक्रिया से हमें प्रेरणा हैं और हमारा मनोबल भी बढ़ता हैं। आपका प्रतिक्रिया हमारा मार्गदर्शन हैं कृपया इस निबंध के निचे अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दे। इसी शृंखला में चलिए शुरू करते हैं दूसरी प्रेरक कहानी - 'बिना विचारे कोई काम मत करो' Hindi Kahani For Kids


Hindi Kahani For Kids बिना विचारे कोई काम मत करो

Hindi Kahani For Kids बिना विचारे कोई काम मत करो
                                               Hindi Kahani For Kids बिना विचारे कोई काम मत करो

एक किसान ने एक नेवला पाल रखा था। नेवला बहुत चतुर और स्वामिभक्त था। एक दिन किसान कहीं गया था। किसान की पत्नी अपने छोटे बच्चे को दूध पिलाकर सुला दिया और नेवले को वही छोड़कर वह घड़ा और रस्सी लेकर कुवें पर पानी भरने चली गयी। 

किसान की पत्नी के चले जाने पर वहाँ एक काला साँप बिल में से निकल आया। बच्चा पृथ्वी पर कपड़ा बिछाकर सुलाया गया था और साँप बच्चे की ओर आ रहा था। नेवले ने यह देखा तो साँप के ऊपर टूट पड़ा। उसने साँप को काटकर टुकड़े-टुकड़े कर डाला और घर के दरवाजे पर किसान की पत्नी का रास्ता देखने लगा। Hindi Kahani For Kids

किसान की पत्नी घड़ा भरकर लौटी। उसने घर के बाहर दरवाजे पर नेवले को देखा। नेवले के मुख में रक्त लगा देखकर उसने समझा की इसने मेरे बच्चे को काटा हैं। दुःख और क्रोध के भरा घड़ा उसने नेवले पर पटक दिया। बेचारा नेवला कुचलकर मर गया। स्पॉट डेथ हो गया बेचारे का। 

वह स्त्री दौड़कर घर में आयी।  उसने देखा की उसका बच्चा सुखपूर्वक सो रहा हैं और वहाँ एक काला साँप कटा पड़ा हैं। स्त्री को अपनी भूल का पता लग गया। वह दौड़कर फिर नेवले के पास आयी और मरे नेवले को गोद में उठाकर रोने लगी। लेकिन अब उसके रोने से क्या लाभ ? इसीलिए कहा हैं - Hindi Kahani For Kids
                            
                                       बिना बिचारे जो करै, सो पाछे पछताय। 
                                       काम बिगारे आपनो, जगमे होत हँसाय ।। 

तो दोस्तों, अभिभावकों, माताओ और बहनो आपको यह कहानी कैसी लगी अपनी प्रतिक्रिया कमेंट बॉक्स में जरूर देने का कष्ट करें। आपके प्रतिक्रिया से हमें प्रेरणा हैं और हमारा मनोबल भी बढ़ता हैं। आपका प्रतिक्रिया हमारा मार्गदर्शन हैं कृपया इस निबंध के निचे अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दे। इसी शृंखला में चलिए शुरू करते हैं दूसरी प्रेरक कहानी - स्वर्ग के दर्शन' 


स्वर्ग के दर्शन - Hindi Story For Child 

लक्ष्मीनारायण बहुत भोला लड़का था। वह प्रतिदिन रात में सोने से पहले अपनी दादी से कहानी सुनाने को कहता था। दादी उसे नागलोक, पाताल, गंधर्वलोक, चंद्रलोक, सूर्यलोक आदि की कहानियाँ सुनाया करती थी। एक दिन दादी ने उसे स्वर्ग की कहानी सुनाई। स्वर्ग का वर्णन इतना सुन्दर था की उसे सुनकर लक्ष्मीनारायण स्वर्ग देखने के लिए हठ करने लगा। 

दादी ने उसे बहुत समझाया की मनुष्य स्वर्ग नहीं देख सकता; किन्तु लक्ष्मीनारायण रोने लगा। रोते-रोते ही वह सो गया। उसे स्वप्न में दिखायी पड़ा की एक चम्-चम् चमकते देवता उसके पास खड़े होकर कह रहे हैं -'बच्चे! स्वर्ग देखने के लिए मूल्य देने पड़ते हैं। तुम सर्कस देखने जाते हो तो टिकट देते हो न? स्वर्ग देखने के लिये भी तुम्हे उसी प्रकार रुपये देने पड़ेंगे।' Hindi Kahani For Kids.

स्वप्न में ही लक्ष्मीनारायण सोचने लगा की मैं दादी से रुपये माँगूँगा। लेकिन देवता ने कहा - 'स्वर्ग में तुम्हारे रुपये नहीं चलते। यहाँ तो भलाई और पुण्यकर्मो का रुपया चलता हैं। अच्छा, तुम यह डिबिया अपने पास रखो। जब तुम कोई अच्छा काम करोगे तो एक रुपया इसमें आ जायेगा और जब तुम कोई बुरा काम करोगे तो एक रुपया इसमें से उड़ जायगा। जब यह डिबिया भर जाएगी, तब तुम स्वर्ग देख सकोगे।'

Hindi Kahani For Kids - जादुई डिबिया   

जब लक्ष्मीनारायण की सुबह नींद खुली तो उसने अपने सिरहाने सचमुच एक डिबिया देखी। डिबिया लेकर वह बड़ा प्रसन्न हुआ। उस दिन उसकी दादी ने उसे एक पैसा दिया पैसा लेकर वह घर से निकला। एक रोगी भिखारी उससे पैसा माँगने लगा। लक्ष्मीनारायण भिखारी को बिना पैसा दिये भाग जाना चाहता था, इतने में उसने अपने अध्यापक को सामने से आते देखा।

उसके अध्यापक उदार लड़को की बहुत प्रशंसा किया करते थे। उन्हें देखकर लक्ष्मीनारायण ने भिखारी को पैसा दे दिया। अध्यापक ने उसकी पीठ ठोंकी और उसकी खूब प्रशंसा की। घर लौटकर लक्ष्मीनारायण वह डिबिया खोली; किन्तु वह खाली पड़ी थी।  इस बात से लक्ष्मीनारायण को बहुत दुःख हुआ। Hindi Kahani For Kids

वह रोते-रोते सो गया। सपने में उसे वही देवता फिर दिखायी पड़े और बोले - 'तुमने अध्यापक से प्रशंसा पाने के मोह में भिखारी को पैसा दिया था, सो प्रशंसा मिल गयी। अब रोते क्यों हो ? किसी लाभ की आशा से जो अच्छा काम किया जाता हैं, वह तो व्यापार हैं, वह पुण्य थोड़े ही हैं।'

दूसरे दिन लक्ष्मीनारायण को उसकी दादी ने दो आने पैसे दिये। पैसे लेकर उसने बाजार जाकर दो संतरे ख़रीदे।' उसका साथी मोतीलाल बीमार था। बाजार से लौटते समय वह अपने मित्र को देखने उसके घर चला गया। मोतीलाल को देखने घर वैद्य आये थे। वैद्य जी ने दवा देकर मोतीलाल की माता से कहा -'इसे आज संतरे का रस देना।' मोतीलाल की माता बहुत गरीब थी।


संतरे मोतीलाल की माँ को दिये

वह रोने लगी और बोली - 'मैं मजदूरी करके पेट भरती हूँ। इस समय बेटे की बीमारी में कई दिन से काम करने नहीं जा सकी। मेरे पास संतरे खरीदने के लिये एक भी पैसा नहीं हैं।' लक्ष्मीनारायण ने अपने दोनों संतरे मोतीलाल की माँ को दिये। वह लक्ष्मीनारायण को आशीर्वाद देने लगी। घर आकर जब लक्ष्मीनारायण ने अपनी डिबिया खोली तो उसमे दो रुपये चमक रहे थे। 

एक दिन लक्ष्मीनारायण खेल में लगा था। उसकी छोटी बहिन वहाँ आयी और उसके खिलौनों को उठाने लगी। लक्ष्मीनारायण ने उसे रोका। जब वह नहीं मानी तो उसने उसे पिट दिया। बेचारी लड़की रोने लगी। इस बार जब उसने डिबिया खोली तो देखा की उसके पहले के इकट्ठे कई रुपये उड़ गये हैं। अब उसे बड़ा पश्चाताप हुआ। उसने आगे कोई बुरा काम न करने का पक्का निश्चय कर लिया। 

मनुष्य जैसे काम करता हैं, वैसा उसका स्वभाव हो जाता हैं। जो बुरे काम करता हैं, उसका स्वभाव बुरा हो जाता हैं। उसे फिर बुरा काम करने में आनंद आता हैं। जो अच्छा काम करता हैं, उसका स्वभाव अच्छा हो जाता हैं। उसे बुरा काम करने की बात भी बहुत बुरी लगती हैं। लक्ष्मीनारायण पहले रुपये के लोभ से अच्छा काम करता था। Hindi Kahani For Kids

धीरे-धीरे उसका स्वभाव ही अच्छा काम करने का हो गया। अच्छा काम करते-करते उसकी डिबिया रुपयों से भर गयी। स्वर्ग देखने की आशा से प्रसन्न होता, उस डिबिया को लेकर वह अपने बगीचा में पहुँचा। लक्ष्मीनारायण ने देखा की बगीचे में पेड़ के निचे बैठा हुआ एक बूढ़ा साधू रो रहा हैं। वह दौड़ता हुआ साधू के पास गया और बोलै -'बाबा! आप क्यों रो रहे हैं ?' साधू बोला - 'बेटा! जैसी डिबिया तुम्हारे हाथ में हैं, वैसी ही एक डिबिया मेरे पास थी।

स्वर्ग के दर्शन - Hindi Story For Child
                                                             स्वर्ग के दर्शन - Hindi Story For Child

स्वर्ग के दर्शन Hindi Kahani For Kids

बहुत दिन परिश्रम करके मैंने उसे रुपयों से भरा था। बड़ी आशा थी की उसके रुपयों से स्वर्ग देखूँगा; किन्तु आज गंगाजी में स्नान करते समय वह डिबिया पानी में गिर गयी।' लक्ष्मीनारायण बोला - 'बाबा! आप रोइये मत। मेरी डिबिया भी भरी हुई हैं। आप इसे ले लो।' साधू बोला -' तुमने इसे बड़े परिश्रम से भरा हैं, तुम्हें इसे देने से दुःख होगा।'

लक्ष्मीनारायण ने बड़े आदरपूर्वक कहा - 'मुझे दुःख नहीं होगा बाबा! मैं तो लड़का हूँ। मुझे अभी पता नहीं कितने दिन जीना हैं। मैं तो ऐसी कई डिबिया रुपये इकठ्ठा कर सकता हूँ। आप बूढ़े हो गये हैं। आप अब दूसरी डिबिया पता नहीं भर पाएँगे की नहीं। इसीलिए आप मेरी डिबिया ले लीजिये।' Hindi Kahani For Kids

साधू ने डिबिया लेकर लक्ष्मीनारायण के नेत्रों पर हाथ फेर दिया। लक्ष्मीनारायण के नेत्र बंद हो गये। उसे स्वर्ग दिखायी पड़ने लगा - ऐसा सुन्दर स्वर्ग की दादी ने जो स्वर्ग का वर्णन किया था उससे भी बहुत बढ़िया स्वर्ग दिख रहा था। Hindi Kahani For Kids

जब लक्ष्मीनारायण ने नेत्र खोले तो साधू के बदले स्वप्न में दिखायी पड़नेवाले वही देवता उसके सामने प्रत्यक्ष खड़े थे। देवता ने कहा - 'बेटा! जो लोग अच्छे काम करते हैं, स्वर्ग उनका घर बन जाता हैं। तुम इसी प्रकार जीवन में भलाई करते रहोगे तो अंत में स्वर्ग में पहुँच जाओगे।' देवता इतना कहकर वही अदृश्य हो गए। लक्ष्मीनारायण ने पूरी जीवन भर भलाई का काम करने का कसम खाया और खेलते-कूदते घर आ गया।


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Hindi Kahani For Kids | पिता और पुत्र Hindi Kahani For Kids | पिता और पुत्र Reviewed by Hindi Story Of on December 18, 2019 Rating: 5

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