Hindi Story Of Animals With Moral | कबूतर और कबूतरी

Hindi Story Of Animals With Moral , कबूतर और कबूतरी का त्याग
Hindi Story Of Animals With Moral , कबूतर और कबूतरी का त्याग


 यह Hindi Story Of Animals कबूतर और कबूतरी के त्याग की कहानी हैं जो बहुत ही शिक्षाप्रद हैं। हमारे जीवन में कई बार जानवरो की कहानी (Hindi Stories On Animals With Moral) भी हमें बहुत कुछ सीखा जाती हैं और जीवन जीने का ढंग बता जाती हैं। महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित 18 पुराण, प्रेरक कहानियों का अथाह समुद्र हैं यह पौराणिक कथाएँ हमें जीवन का सार बताती हैं यह कहानियाँ हमें वह अमूल्य ज्ञान प्रदान करती हैं जो आजकल के मॉडर्न विद्यालयों में नहीं मिलपाती हैं।


समाज में इन्ही प्रेरक या पौराणिक कहानियों की कमी हैं जिस कारण आज समाज कही न कही गलत दिशा में अग्रसर हो रहा हैं। कहानियाँ समाज का निर्माण करती हैं जिस समाज में गलत कहानियों का प्रचार-प्रसार हैं उस समाज में विष घोलने का कार्य इन गलत कहानियों द्वारा किया जा रहा हैं। महर्षि वेद-व्यास जी भविष्यदर्षी थे भविष्य में होने वाली घटनाओ को उन्होंने बखूबी भविष्य पुराण में लिखा भी हैं। 

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कलयुग के प्रभाव को कम करने के लिए समाज से कुरीतियों को निकालने के लिए एक सभ्य, संस्कारी समाज स्थापित करने के लिए ही महर्षि वेद व्यास ने महाभारत, पुराण आदि सत्य कहानियों की रचना की। इन्ही सब कहानियों में से खोज के हम एक-से-एक चुनिंदा कहानी आपके लिए आपके बच्चो के लिए हमेशा ले के आते रहते हैं ताकि आप इन रोचक कहानियो का आनंद ले सके और शिक्षा ग्रहण कर सके। आज हम अपने इस आर्टिकल में पुराणों में आये कबूतर और कबूतरी के त्याग की प्रेरक कहानी को शुरू करते हैं -

Hindi Story Of Animals

पुराने समय की बात हैं किसी राज्य में चिड़ियों को फँसाकर उन्हें बेचनेवाला एक बहेलिया रहता था। वह दिनभर गोंद लगा बाँस लिये वैन में घुमा करता था और चिड़ियों को फँसाया करता था। एक बार सर्दी के दिनों में बहेलिया बड़े सवेरे जंगल में गया। उस दिन उसे कोई चिड़िया नहीं मिली। एक जंगल से दूसरे जंगल में भटकते हुए उसे पूरा दिन बीत गया। वह इतनी दूर निकल गया था की घर नहीं लौट सकता था। अँधेरा होने पर एक पेड़ के निचे रात बिता देने के विचार से वह उसके निचे बैठ गया।

उस दिन, दिन में वर्षा हुई थी।  ओले भी पड़े थे। सर्दी खूब बढ़ गयी थी। बहेलिये के पास कपडे नहीं थे। वह जंगल में रात बिताने की बात सोचकर घर से नहीं चला था। हवा जोर से चलने लगी। बहेलिया ठण्ड से थर-थर काँपने लगा।  जाड़ के मारे उसके दाँत कट-कट काँपने लगा।

जिस पेड़ के निचे बहेलिया बैठा था, उस पेड़ के ऊपर कबूतर का एक जोड़ा घोंसला बना कर रहता था। बहेलिये की दुर्दशा   कबूतरी से कहा - 'यद्यपि यह हमलोगो का शत्रु हैं; किन्तु आज हमारे यहाँ अतिथि हुआ हैं। इसकी सेवा करना हमलोगो का।   रात प्रारम्भ हुई हैं। जाड़ा अभी बढ़ेगा। यदि इसे ऐसे ही रहना पड़ा तो रात भर में यह जाड़े के मारे मर जायेगा। हमलोगो को इसकी मृत्यु का पाप लगेगा। इसका जाड़ा दूर करने का उपाय करना चाहिए।'

Hindi Story Of Animals
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दोनों ने अपना घोंसला जला दिया 

कबूतरी और कबूतर ने अपना घोंसला निचे गिरा दिया। थोड़े और तिनके चोंचों में दबा- दबाकर लाकर गिराए। फिर कबूतरी उड़ गयी और दूर से एक जलती लकड़ी चोंच में पकड़कर ले आयी। वह लकड़ी उसने तिनको पर डाल दी। तिनके जलने लगे। बहेलिया ने भी आस-पास से इकट्ठी करके और लकड़ियाँ आग में डाल दी। आग खूब जलने लगी बहेलिया का आग तापने से जाड़ा दूर हो गया।

बहेलिया दिन भर का भूखा भी था। रात के घने अँधेरे में वो कहा से भोजन का प्रबंधन करता इसीलिए अपनी भूख को दबाने लगा। कुछ देर बार भूख से जब नहीं रहा गया तब वह आग के रौशनी में खाने के लिए कुछ ढूंढने लगा की कही मिल जाये तो खाकर भूख मिटावें। उसका मुख भूख से सुख रहा था। वह खाने के लिए व्यग्र होने लगा। लेकिन इस ठण्ड में अँधेरी रात में वह आग को छोड़ कर जाना प्राण खोने जैसा ही था।
कबूतरी ने जब यह देखा तो कबूतर से बोली -'अतिथि तो साक्षात् भगवान का स्वरुप होता हैं। जिसके घर से अतिथि भूखा चला जाता हैं, उसके सब पुण्य नष्ट हो जाते हैं। यह बहेलिया आज हमलोगों का अतिथि हैं और भूखा हैं। हमारे पास इसकी भूख मिटाने को और तो कुछ हैं नहीं, मै इस जलती आग में कूद जाती हूँ, जिससे मेरा मांस खाकर यह अपना पेट भर लें।

Hindi Story Of Animals With Moral

कबूतरी इतना कहकर पेड़ से अग्नि में कूद पड़ी। कबूतर ने अपने मन में कहा- 'इस अतिथि का पेट कबूतरी के थोड़े से मांस से कैसे भरेगा ! मैं भी आग में कूदकर अपना मांस इसे दूँगा। हम दोनों का मांस खाकर इसका भूख शांत हो जायेगा। इस आशा में कबूतर ने भी कबूतरी की तरह पेड़ से जलती हुई अग्नि में कूद गया। 

उसी समय आकाश में बाजे बजने लगे। फूलों की वर्षा होने लगी। देवताओं का विमान उतरा और उसमे बैठकर देवताओं के सामान रूप धारण करके कबूतर और कबूतरी उस दिव्य लोक को चले गये, जहाँ बड़े-बड़े यज्ञ करने वाले राजा तथा बड़े-बड़े ऋषि-मुनि भी बड़ी कठिनाई से पहुँच पाते हैं।

यह सारी घटना बहेलिया देख रहा था उसको अपने ऊपर बहुत लज़्ज़ा आई उसने देखना की कैसे एक जानवर भी धर्म का कितना साथ दे रहा हैं मैंने जिंदगी भर जिन चिड़ियों को पकड़ा आज उन्ही चिड़ियों ने अपनी जान देकर मेरे प्राण की रक्षा की  यह सब विचार करने के कारन उसका हृदय परिवर्तित हो गया और उसने फिर कभी भी जीवन में  चिड़ियों को पकड़ने का कार्य नहीं करने का प्रण किया।


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Hindi Story Of Animals With Moral | कबूतर और कबूतरी Hindi Story Of Animals With Moral | कबूतर और कबूतरी Reviewed by Hindi Story Of on December 13, 2019 Rating: 5

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