Hindi Story Of Krishna | भगवान् श्री कृष्ण

Hindi Story Of Krishna -हिन्दू धर्म में श्री कृष्ण भगवान् के रूप में पूजे जाते हैं। इनको विष्णु का अवतार भी कहा जाता हैं। इस आर्टिकल में हम भगवान् श्री कृष्ण की संक्षिप्त जीवनी पर प्रकाश डालेंगे।

हमें श्री कृष्ण के जीवन से बहुत प्रेरणा और शिक्षा मिलती हैं। योगेश्वर मुरलीधर, गोपाल, मोहन, कन्हैया, आदि अनेक नामो से भी भगवान् कृष्ण को पुकारा जाता है।

Hindi Story Of Krishna सर्वोत्तम motivational story in Hindi  से एक हैं।- द्वापर युग में एक राजा थे। राजा का नाम उग्रसेन था। उग्रसेन के लड़के का नाम कंस था और भतीजी का नाम देवकी था। देवकी के पिताजी का नाम देवक था। देवक कंस के चाचा थे। कंस बहुत ही अत्याचारी तथा दुष्ट राजकुमार था।

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उसके कर्म से पूरी प्रजा दुखी थी लेकिन उसके ताकत के आगे किसी की हिम्मत कुछ भी बोलने की नहीं होती थी। वह चचेरी बहन को बहुत प्रेम करता था। देवकी का विवाह वासुदेव जी के साथ हुआ। जब देवकी वसुदेवकी के साथ जा रही थी, तब कंस भी उन्हें पहुँचाने के लिया गया।   आप पढ़ रहे हैं Hindi Story Of Krishna.


Hindi story of Krishna : Birth
                                                                       Hindi story of Krishna : Birth


Hindi story of Krishna : Birth

कंस बड़ा प्रसन्न था तथा खुद ही रथ चला रहा था।  उसी समय आकाशवाणी हुई 'जिसे तू इतनी प्रसन्नत्ता से ले जा रहा, उसीका आठवाँ बच्चा तुझे मारेगा।' यह सुनकर कंस को बड़ा गुस्सा आया। वह देवकी को मारने पर तूल गया। उसके केश पकड़कर तलवार खिंच ली। तभी वासुदेव जी ने उसे ऐसा करने से रोका। उन्होंने कहा - 'तुम अपनी बहन को मत मारो, इसके बच्चो को मार डालना।' कंस ने यह बात मान ली। उसने देवकी और वासुदेव देव जी को जेल में लोहे के जंजीर से बांध कर कैद कर दिया।

समय बीतता गया देवकी और वसुदेवजी के सात बच्चे हुवे सभी सतो बच्चो को कंस ने अपने हाथो से मार दिया डाला। जब आठवाँ बच्चा पैदा होने वाला था तब जेल के चारो तरफ पहरादार बढ़ा दिए गए तथा चारो तरफ कड़ा पहरा बैठा दिया गया। रात के समय बारह बजे बच्चा पैदा हुआ। भादों का महीना था। वासुदेव और देवकी इस बच्चे को बचाना चाहते थे। यह काम कठिन था।

भगवान् की कृपा हुई और उस समय  पहरेदार सो गये। जेल के दरवाजे खुल गये। बेड़िया अपने आप खुल गई। वासुदेव जी इस घनघोर बारिश में उफान भरती हुई यमुना नदी को पार कर बच्चे को लेकर गोकुल आ गए।   वहाँ उनके मित्र नन्दबाबा रहते थे। वासुदेव जी बच्चे को नंदबाबा के यहाँ छोड़ कर तथा अपने साथ नंदबाबा की एक लड़की उसका जन्म भी उसी समय हुआ था उसको लेकर मथुरा लौट आये। फिर उसी तरह जेल  दरवाजे अपने आप बंद हो गए बेड़िया भी बांध गई और पहरेदारो की गहरी निंद्रा भी छूट गई। सुबह कंस ने इस बच्चे को देवकी का आठवाँ संतान समझ मार डाला।

श्रीकृष्ण का बचपन; Motivational Story in Hindi

वह बच्चा कोई और नहीं साक्षात् विष्णु अवतार श्री कृष्ण थे। नंदबाबा के घर ही श्री कृष्ण का पालन-पोषण हुआ।  नन्द बाबा के घर श्री कृष्ण पलने लगने। वे बड़े सुन्दर बालक थे। उनको देख कर सभी कोई मोहित हो जाता था। उनकी बोली बहुत ही मीठी थी। सभी गोकुल वासु श्रीकृष्ण   के प्यार करना चाहते थे।   गोपियाँ दिन भर बालक कृष्ण के साथ खेलने में ही बिता देती थी। बालक श्री कृष्ण बहुत नटखट भी थे। उनको मक्खन और गाय से बहुत प्रेम हैं। बाल-गोपाल सब गाय भी चराते थे


बाल-गोपाल गाय चराते हुये
बाल-गोपाल गाय चराते हुये

श्री कृष्ण बड़े अच्छे-अच्छे काम करते थे। उनके खेलों और कामो को देख कर सभी गोकुलवासी बड़े प्रसन्न होते थे। बचपन में ये गौएँ चराते थे। खेल  किसी का दही गिरा देते। किसी का मक्खन खा जाते। फिर भी गोकुल वासी उन्हें बहुत प्यार करते थे। यूँ तो भगवान् श्री कृष्ण के सहस्त्र से भी ज्यादा नाम हैं लेकिन सुरीली बाँसुरी बजाने की कला के चलते उन्हें मुरलीधर भी कहा जाता हैं। श्री कृष्ण बहुत ही सरूली बांसुरी बजाते थे।

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धर्म ग्रंथो में उल्लेख हैं की जब श्री कृष्ण अपनी बाँसुरी बजाया करते थे तो सभी गाये उनके पास आए जाती थी मुरझाये फूल भी खिलने लगते थे। किसी का कितना  दुःख क्यों ना हो मुरली की बांसुरी की धुन सुनने  भर में ही ख़त्म हो जाती थी।

बचपन में ही किया कई राक्षसों का वध

श्री कृष्ण के गुण का बखान चारो दिशा में होने लगा। गोकुल से बाहर भी  विलक्षण प्रतिभा की चर्चा होने लगी। कंस को भी इस बात का पता लग गया था। उसका संदेह पक्का गया की श्रीकृष्ण ही वह आठवा लड़का हैं  उसका वध करने के लिए हुआ हैं। वह कृष्ण मारने कोशिश करने लगा। उसने कई राक्षस और राक्षसियों को इन्हे मारने के लिए भेजा।


भगवान् श्री कृष्ण ने अल्पायु में ही अनेक राक्षसों का वध कर प्रजा की रक्षा की थी। कंस की भेजी हुई राक्षसी जिसका पूतना था जो बालक कृष्ण को अपना जहरीला दूध पीला कर मारने आई थी। उस राक्षसी  पीते -पीते मार डाला था। इसके बाद तृणावर्त, बकासुर, अघासुर, धेनुक आदि कई राक्षस मारे थे।

Hindi story of Krishna - Kaliya Nag
Hindi story of Krishna - Kaliya Nag

इन्ही दिनों यमुना के जल में एक जगह एक बड़ा विषैला साँप रहता था। उसके डर से कोई वहाँ का पानी नहीं पि सकता था। एक बार इनके मित्रो ने यह पानी पि लिया और बेहोश हो गए थे। तब भगवान् श्री कृष्ण ने यमुना  छलांग लगा दी थी और उस साँप को वहाँ से निकाल दिया।
 

कंस का वध ; Hindi Story with Moral

कंस सदा कृष्णा को मारने का उपाये सोचता रहता था। जब ये बड़े हुए, तब उसने इन्हे मथुरा बुलाया। इनके भाई बलराम जी भी साथ गए। वहाँ एक बड़ा मंच बनाया गया था। यहाँ इनकी दो ;राक्षसों के साथ कुश्ती हुई। भगवान् श्री कृष्ण और भगवान् बलराम ने सभी राक्षसों को कुश्ती में पराजित कर उनका वध कर दिया।


कंस की सभा में बलराम जी और कृष्ण जी द्वारा राक्षसो के साथ कुश्ती लड़ते हुये। 
कंस की सभा में बलराम जी और कृष्ण जी द्वारा राक्षसो के साथ कुश्ती लड़ते हुये। 

 बाद में कंस खुद कृष्ण को मारने के लिए तैयार हो गया क्रोध की अग्नि में जलता हुआ कंस अपनी सिंहासन से उठ खड़ा हुआ। कृष्ण ने उससे पहले मंच पर चढ़ गए और कंस को मंच से निचे गिरा दिया। उसके बाद से भगवान् ने कंस की छाती पर प्रहार करके उसी लीला समाप्त कर दी। कंस वध के साथ ही देवकी और वासुदेव के विवाह के समय हुई आकाशवाणी सत्य हुई और भगवान् श्री कृष्ण ने प्रजा की रक्षा के लिए कंस जैसे अनेक राक्षसों के साम्राज्य का वध किया। 


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कंस का वध करने के पश्चात् श्री कृष्ण ने अपने माता-पिता की कैद से छुड़ाया। अपने नाना तथा कंस के पिताजी उग्रसेन को पुनः वहाँ का राजा बनाया। कंस वध के पश्चात् कंस के ससुर जरासंध ने कंस के मृत्यु का बदला लेने के लिए ठान ली जिस वजह से उसने मथुरा पर चढ़ाई कर दी।  श्री कृष्ण ने जरासंध को कई बार हराकर भगा दिया।

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अंत में बखेड़े से बचने के लिए श्रीकृष्ण ने सबको लेकर द्वारका चले गए वहाँ उन्होंने एक नए राज्य की स्थापना की। ग्रंथो से पता चलता हैं की द्वारका स्वर्ण नगरी थी जो बहुत ही अत्याधुनिक भी थी। आज भी द्वारिका राज्य के निशाँ समुद्र के गहराइयों में पुरातत्व विभाग को मिला हैं। श्री कृष्ण के जाने के बाद द्वारका धीरे-धीरे जलमग्न हो गई।

Hindi Story Of Krishna : शिक्षा

श्री कृष्ण भले ही भगवान् के रूप थे लेकिन मानव योनि में जन्म लेने  कारण उन्होंने भी शिक्षा ग्रहण की थी। श्री कृष्ण जैसा महान शिक्षित, ज्ञानी और गुणी आज तक कोई जन्म नहीं लिया हैं। श्रीकृष्ण को 16 कलाओ का जनक भी कहा जाता हैं। गीता जैसे महान ग्रन्थ श्री कृष्ण के वचन ही हैं। उनका उपदेश ही गीता का ज्ञान हैं।   श्री कृष्ण के गुरुजी  का नाम गुरु सांदीपनि था।

 इसी गुरुकुल में उनके साथ एक बहुत ही गरीब ब्राह्मण का पुत्र पढता था, उसका नाम सुदामा था। श्री कृष्ण और सुदामा में बहुत मित्रता थी। जब श्री कृष्ण राजा हुए, तब सुदामा उनके पास गए थे। उन्होंने सुदामा का बहुत आदर-सत्कार किया तथा खूब धन देकर विदा किया था। सुदामा और कृष्ण की मित्रता की कहानी पुरे विश्व में बहुत प्रसिद्ध हैं।


पांडवो की मदद

श्री कृष्ण के समय ही महाभारत जैसा भयंकर युद्ध हुआ था। श्री कृष्ण ने इस युद्ध  बहुत प्रयास किया था लेकिन अहंकार और अधर्म से प्रेरित कौरवों ने कृष्ण की एक बात भी नहीं सुनी परिणाम स्वरुप कौरवों और पांडवो के बिच महाभारत का प्रसिद्ध युद्ध हुआ। इस युद्ध में कौरवो ने अधर्म का तो वही पांडवो ने धर्म का साथ दिया था। 

लगभग पुरे आर्यव्रत (वर्तमान आधा यूरोप पूरा एशिया) के राजा इस महाभारत युद्ध में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप में सम्मिलित थे। कुछ राजा कौरवो का साथ दे रहे थे तो कुछ अपनी पूरी सेना और ताकत के साथ पांडवो की ओर से युद्ध भूमि में खड़े थे। कौरवो की माँग पर श्री कृष्ण की नारायणी सेना कौरवो की तरफ से तो श्री कृष्ण खुद युद्ध में शस्त्र नहीं उठाने  वचन के साथ पांडवो के साथ थे। या यूँ कहे की पांडव धर्म के साथ थे इसीलिए भगवान् श्री कृष्ण उनके साथ थे।

Hindi story of Krishna - Mahabharat
Hindi story of Krishna - Mahabharat
इस युद्ध के दौरान श्री कृष्ण ने पांडवो में से एक अर्जुन को सबसे अनमोल ज्ञान गीता का उपदेश दिया। इस युद्ध में धर्म की जित हुई और पुरे विश्व में पुनः धर्म का स्थापना पांडवो द्वारा हुआ। 

स्वधाम गमन -

 श्री कृष्ण ने द्वारका में बहुत वर्षो तक उग्रसेन को राजा मानकर राज्य किया। एक दिन ये एक जंगल में पेड़ के निचे सो रहे थे। वहाँ एक बहेलिया आया। उसने दूर से इनके लाल तलवे देखे और वह इन्हें हिरन का मुँह समझा। उसने तीर चला दिया। तीर सीधे श्री कृष्ण को लग लिया। बाद में ये स्वधाम सिधार गये।

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