Moral Stories For Kids In Hindi. प्रेरक कहानियाँ हिंदी में.

Moral Stories In Hindi - Short Moral Stories For Kids In Hindi. बच्चों के व्यकित्व निर्माण में प्रेरक कहानियाँ हिंदी में अहम भूमिका निभाती हैं. यदि माता-पिता बचपन से ही अपने बच्चो को उपदेशप्रद और शिक्षाप्रद कहानियों को पढ़ कर सुनाना या उन्हें खुद पढ़ने के लिए प्रेरित करें तो बच्चों में अच्छे संस्कार, साथ ही चतुराई, दया, प्रेम और करुणा के गुणों का विकास होता हैं.

तो चलिए बिना समय नष्ट किये बढ़ते है Short Moral Stories In Hindi For Kids की तरफ इस आर्टिकल में कुल 6 कहानियाँ हैं जो प्रेरणा और शिक्षा से भरपूर हैं. देती हैं. प्रस्तुत हैं Moral Stories For Kids in hindi

Moral Stories For Kids In Hindi प्रेरक कहानियाँ हिंदी में
Moral Stories For Kids In Hindi. प्रेरक कहानियाँ हिंदी में.
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Moral Stories In Hindi - लालची कुत्ता 

एक कुत्ता मुख में रोटी का टुकड़ा लिए कहीं जा रहा था. रास्ते में पानी पड़ता था. पानी गहरा नहीं था. कुत्ता जब पानी में होकर चलने लगा, तब उसे पानी में अपनी परछाई दिखाई पड़ी. कुत्ते ने सोचा की -'पानी में दूसरा कुत्ता रोटी लिए जा रहा हैं. मैं इसकी रोटी छीन लूँ तो मेरे पास पूरी रोटी हो जाएगी। Moral Stories For Kids

कुत्ते ने जैसे ही परछाई वाले कुत्ते की रोटी छीनने के लिए मुँह खोला, उसके मुख की रोटी पानी में गिर गई. उसने पानी  खोजा लेकिन उसे ना  रोटी टुकड़ा मिला ना ही परछाई वाले कुत्ते की रोटी।वह अपना-सा मुँह लेकर रह गया।

आधी छोड़ पूरी को धावै। आधी रहे न पूरी पावै।  
Moral Stories In Hindi
Moral Stories In Hindi

Moral Stories For Kids In Hindi बुद्धिमान माली 

फारस देश का राजा नौशेरवाँ अपनी न्यायप्रियता के लिए बहुत प्रसिद्ध हो गया था. वह बहुत दानी भी था. एक दिन अपने मंत्रियों के साथ वह घूमने निकला। Moral Stories For Kids In Hindi.

उसने देखा की एक बगीचे में एक बहुत बूढ़ा माली अखरोट के पेड़ लगा रहा हैं. बादशाह उस बगीचे में गया। उसने उस बूढ़े माली से कहा-'तुम यहाँ नौकर हो या यह तुम्हारा ही बगीचा हैं ?'

माली- 'मैं नौकरी नहीं करता। यह बगीचा मेरे ही बाप दादाओं का लगाया हुआ हैं.'

बादशाह -'तुम ये अखरोट के पेड़ लगा रहे हो। क्या तुम समझते हो की इनका फल खाने के लिए तुम जीवित रहोगे ?'

अखरोट का पेड़ लगाने के बिस वर्ष बाद फलता हैं, यह बात प्रसिद्ध हैं. बूढ़े माली ने बादशाह की बात सुनकर कहा- 'मैं अबतक दूसरों के लगाए पेड़ों के बहुत फल खा चूका हूँ. इसीलिए मुझे भी दुसरो के लिए पेड़ लगाना चाहिए। अपने फल खाने की आशा से पेड़ लगाना तो स्वार्थपरता हैं.'

बादशाह माली के उत्तर से बहुत प्रसन्न हुआ. उसने उसे पुरस्कार में दो अशर्फियाँ दी. इस कहानी से हमें यह सिख मिलती हैं सिर्फ अपने लाभ हेतु ही नहीं बल्कि दुसरो के लाभ हेतु भी हमें कार्य करना चाहिए साथ ही खूब पेड़ लगाना चाहिए।

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दूसरे का भरोसा मत करो 

एक किसान के पास एक बैल और एक घोड़ा था. वे दोनों एक साथ जंगल में चरते थे. किसान के पड़ोस में एक धोबी रहता था. धोबी के पास एक गधा और एक बकरी थी. धोबी भी उन्हें उसी जंगल में चरने को छोड़ देता था. एक साथ चरने से चारो पशुओ में मित्रता हो गयी. 

वे साथ ही जंगल में आते और शाम को एक साथ ही जंगल से चले जाते थे। उस जंगल में एक खरगोश भी रहता था. खरगोश ने चारों पशुओं की मित्रता देखि तो सोचने लगा -'मेरी भी इनसे मित्रता हो जाए तो बड़ा अच्छा हो। इतने बड़े पशुओं से मित्रता होनेपर कोई कुत्ता  मुझे तंग नहीं कर सकेगा।'

खरगोश उन चारों के पास बार-बार आने लगा। वह उनके सामने उछलता, कूदता और उनके साथ ही चरता था. धीरे-धीरे चारों के साथ उसकी मित्रता हो गयी. अब खरगोश बड़ा प्रसन्न हुआ. उसने समझा की कुत्तों का भय दूर हो गया।  

एक दिन एक कुत्ता उस जंगल में आया और खरगोश के पीछे दौड़ा। खरगोश भागा-भागा बैल के पास गया और बोला -  'बैल भाई ! यह कुत्ता बड़ा दुष्ट हैं. यह मुझे मारने आया हैं. तुम इसे अपने सींगो से मारो।'

बैल ने कहा -' भाई खरगोश ! तुम बहुत देरी से आये. मेरे घर लौटने के समय हो गया हैं मुझे खेत भी जोतने जाना हैं समय से घर नहीं पहुँचा तो किसान बड़ा गुस्सा होगा तुम घोड़े के पास जाओ.'

Short Moral Stories In Hindi

खरगोश दौड़ता हुआ घोड़े के पास गया और बोला- 'भाई घोडा! मैं तुम्हारा मित्र हूँ। हम दोनों साथ ही यहाँ चरते हैं. आज यह दुष्ट कुत्ता मेरे पीछे पड़ा हैं. तुम मुझे पीठ पर बैठाकर दूर ले चलो.' 

घोड़े ने कहा -' तुम्हारी बात तो ठीक हैं, किन्तु मुझे बैठना आता नहीं। मैं तो खड़े-खड़े ही सोता हूँ. बैल और घोड़े के पास से निराश होकर खरगोश गधे के पास गया. उसने गधे से कहा- 'मित्र गधे! तुम इस दुष्ट कुत्ते पर एक दुलत्ती झाड़ दो तो मेरे प्राण बच जायँ। 

गधा बोला मैं नित्य बैल और घोड़े के साथ घर लौटता हूँ. वे दोनों जा रहे. यदि मैं उनके साथ न जाकर पीछे रह जाऊ तो मेरा स्वामी धोबी डंडा लेकर दौड़ा आएगा और पीटते-पीटते मेरा कचूमर निकल देगा। मैं अब यहाँ ठहर नहीं सकता। 

अंत में खरगोश बकरी के पास गया. बकरी ने उसे देखते ही कहा-' खरगोश भाई! कृपा करके इसधर मत आओ. तुम्हारे पीछे कुत्ता दौड़ता चला आ रहा हैं. मैं उनसे बहुत डरती हूँ. 

सब ओर से निराश होकर खरगोश वहाँ से पूरी जी जान लगाकर भगा. भागते-भागते वह जाकर एक झाड़ी में छिप गया. कुत्ते ने बहुत ढूंढा, किन्तु उसे खरगोश का पता नहीं मिला।

जब कुत्ता लौट गया, तब खरगोश झाड़ी में से निकला। उसने चारो ओर देखा  नजर नहीं आया तो उसने संतोष की साँस ली, फिर वह बोला -'दुसरो का भरोसा करना सदा धोखा देता हैं. अपनी सहायता अपने आप ही करनी चाहिए।


Moral Stories For Kids - कुत्ते की भूल

एक कुत्ता था उसे अंडे खाने का बहुत शौक था वह पक्षियों के अंडे खा-खा के वह अंडे खाने का आदि हो गया था. वह दिनभर खेतों की मेड़ो और नदी किनारे घुमा करता और पक्षियों के अंडे की खोज में रहता था. जहाँ भी उसे अंडे दीखते वह तुरंत उन्हें खा जाता था. साथ ही वह दिनभर नदी किनारे रेत में कछुओं के अंडे खाने के लिए ढूंढा करता था. Moral Stories For Kids In Hindi

एक दिन रेत में पड़ा एक घोंघा कुत्ते ने देखा। उसकी अंडे जैसी सफ़ेद गोल आकृति देखकर उसे अंडा समझकर ख़ुशी से झटपट निगल गया. घोंघे की सिप के टुकड़े कुत्ते पेट में जाकर उसकी आँतों में चुभने लगे।


Moral Stories For Kids In Hindi
Moral Stories For Kids In Hindi

कुत्ता दर्द के मारे छटपटाने लगा. अब वह रोता-रोता   कहने लगा -' मुझसे बहुत बड़ी भूल हुई, अब मैं समझा सभी गोल वस्तुएँ अंडा नहीं होती हैं. अब मैं कुछ भी सोच-समझकर ही खाऊँगा।

जो नासमझ बच्चे बिना जाने कोई भी वस्तु मुँह में डाल लेते हैं, उन्हें इसी प्रकार कष्ट होता हैं. इसीलिए जबतक यह ना जान लो की कोई वस्तु खानेयोग्य हैं या नहीं, उसे मुख में मत डालो। 


उपकार का बदला 

एक बार एक सिंह के पैर में मोटा काँटा चुभ गया. सिंह ने दाँत से बहुत नोचा; किन्तु काँटा निकला नहीं। वह लंगड़ाता हुआ एक गड़रिया के पास पहुँचा। अपने पास सिंह को आते देख गड़रिया बहुत डरा. लेकिन वह जनता था भागने से सिंह दो ही छलाँग में उसे पकड़ लेगा।

पास में कोई पेड़ भी नहीं था  गड़रिया उसपर चढ़ जाए. दूसरा कोई उपाय न देखकर गड़रिया वही चुपचाप बैठ गया. सिंह न गरजा, न गुर्राया। वह गड़रिया के सामने आकर बैठ गया और अपना पैर उसने गड़रिये के आगे कर दिया।

गड़रिया समझ गया की सिंह उसकी सहायता चाहता हैं. उसने सिंह के पैर से काँटा निकाल दिया। सिंह जैसे आया था वैसे ही जंगल की ओर चला गया.

कुछ दिनों पहले राजा के यहाँ चोरी हुई.कुछ लोगो ने शत्रुता के कारण झूठ-मुठ यह बात राजा से कह दी की गड़रिया चोर हैं. उसीने राजा यहाँ चोरी की हैं.

गड़रिया पकड़ा गया. उसके घर में चोरी की कोई वस्तु नहीं निकली। राजा ने समझा की इसने चोरी का सामान कही छुपा दिया हैं. इसीलिए उन्होंने गड़रिये को जीवित सिंह के सामने छोड़ने की आज्ञा दे दी.

Moral Stories In Hindi

संयोग से गड़रिया को मारने के लिए वही शेर पकड़ कर लाया गया, जिसके पैर का काँटा गड़रिये ने निकाला था. जब गड़रिया के सामने छोड़ा गया, सिंह से उसे पहचान लिया। वह गड़रिया के पास आकर बैठ गया और कुत्ते के समान पूँछ हिलाने लगा.  Moral Stories in hindi

Moral Stories in hindi
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राजा को बड़ा आश्चर्य हुआ. पूछने पर जब उन्हें उपकारी गड़रिये के साथ सिंह की कृतज्ञता  ज्ञात हुआ, तब उन्होंने गड़रिये को छोड़ दिया।

सिंह जैसा भयानक पशु भी अपने पर उपकार करने वाले का उपकार नहीं भूलता। मनुष्य होकर जो किसीका उपकार भूल जाते हैं वे पशु से भी गए गुजरे हैं.

इन्हे पढ़े-

घमंड का फल 

समुद्र तट पर बसे किसी नगर में एक धनवान वैश्य पुत्रों ने एक कौआ पाल रखा था. वे उस कौए को बहुत प्रेम करते थे तथा बराबर अपने भोजन से बच्चा अन्न उस कौए को खाने के लिए देते थे. उनकी झूठन खाने वाला वह कौवा स्वादिष्ट तथा पुष्टिकर भोजन खाकर खूब मोटा हो गया था.

धनवान वैश्य पुत्रो के लड़-प्यार की वजह से वह घमंडी हो गया तथा उसका अहंकार बहुत बढ़ गया. वह अपने से श्रेष्ठ पक्षियों को तुच्क्ष समझने लगा तथा उनका अपमान करने सी भी बाज नहीं आता था. एक समुद्र तट पर कहीं से उड़ते हुए आकर कुछ हंस उतरे।

वैश्य के पुत्र उन हंसो की प्रंशसा कर रहे थे, यह बात कौए से सही नहीं गयी. क्युकी अहंकार और घमंड ने उसके सहनशक्ति का नाश कर दिया था. अहंकार में जल रहा कौआ ने हंस से प्रतियोगिता कर उसे हराने का निश्चय किया।

वह उन हंसों के पास गया उसे उनमे जो सर्वश्रेष्ठ हंस प्रतीत हुआ, उससे बोला -' मैं तुम्हारे साथ प्रतियोगिता करके उड़ना चाहता हूँ.'

हंसो ने उसे समझाया -'भैया! हमतो दूर-दूर उड़ानेवाले हैं. हमारा निवास मानसरोवर यहाँ से बहुत दूर हैं. हमारे साथ प्रतियोगिता करने से तुम्हे क्या लाभ होगा। तुम हंसो के साथ कैसे उड़ सकते हो?

बकवादी कौआ 

कौवे ने गर्व में आकर कहा- 'मैं उड़ने की सौ गतियाँ जनता और प्रत्येक से सौ योजन तक उड़ सकता हूँ.' उड्डीन, अवडीन, प्रडीन आदि अनेक झूठी गतियों के नाम गिनाकर वह बकवादी कौआ बोला -'बतलाओ, इनमे से तुम किस गति से उड़ना जानते हो ?'

तब श्रेष्ठ हंस ने कहा -'काक! तुम तो बहुत निपुण लगते हो. परन्तु मैं तो एक ही गति जानता हूँ. जिसे सब पक्षी जानते हैं. मैं उसी गति से उडूँगा। गर्वित कौवे का गर्व और बढ़ गया. वह बोला - 'अच्छी बात, तुम जो गति जानते हो उसी से उड़ो.'

कौवे और हंसो के गुफ्तगू को देखकर आस-पास के और भी पक्षी वहाँ आ गए थे. उनके सामने ही हंस और कौआ की प्रतियोगिता शुरू हुई और वे दोनों समुद्र की ओर उड़ पड़े.

समुद्र ऊपर आकाश में वह कौआ नाना प्रकार की कलाबाजियाँ दिखाता पूरी शक्ति से उड़ा और हंस से कुछ  आगे निकल गया. हंस अपनी स्वाभाविक मंद गति से उड़ रहा था. यह देखकर दूसरे कौए प्रसन्नता मारे झूमने लगे फुदकने लगे.



थोड़ी देर में ही कौए के पंख थकने लगे. वह विश्राम के लिए इधर-उधर वृक्षयुक्त द्वीपों की खोज करने लगा. परन्तु जोश-जोश में उड़ते-उड़ते वह समुद्र के काफी अंदर चला गया था. कौए को उस अनंत सागर के अतिरिक्त कुछ दिख नहीं पड़ता था.

Moral Stories For Kids In Hindi- कौए ने हार मानी

इतने समय में हंस अपने मंद गति से उड़ता हुआ कौआ से आगे निकल गया. कौए की गति मंद हो गयी. वह अत्यन्त थक गया और ऊँची तरंगो और भयंकर जीवों से भरे समुद्र की लहरों के पास गिरने की दशा में पहुँच गया. Moral Stories For Kids In Hindi

हंस ने देखा की कौआ बहुत पीछे रह गया हैं तो रुक गया. उसने कौए के समीप आकर पूछा-' काक! तुम्हारी चोंच और पंख बार-बार पानी में डूब रहे हैं. यह तुम्हारी कौन सी गति हैं?

हंस की व्यंगभरी बात सुनकर कौआ बड़ी दीनता से बोला- 'हंस भाई! हम कौए केवल काँव-काँव करना जानते हैं. हमें भला दूर तक उड़ना क्या आये. मुझे अपनी गलती का एहसास हो गया हैं. मैं आज के बाद कभी अपने आप को बड़ा नहीं समझूंगा और अहंकार नहीं करूँगा। मुझे अपनी मूर्खता का दण्ड मिल गया हैं. कृपा करके अब मेरे प्राण बचालो।' Moral Stories For Kids In Hindi

जल से भीगे, अचेत और अधमरे कौए पर हंस को दया आ गयी. हंस कौए को पैरों से उठाकर हंस ने अपने पीठपर रखलिया। और उसे लादे हुए उड़कर वहाँ आया जहाँ से दोनों उड़े थे.हंस ने कौए को उसके स्थान पर छोड़ दिया. Moral Stories For Kids In Hindi, Moral Stories In Hindi, Moral Stories For Kids.
Moral Stories For Kids In Hindi. प्रेरक कहानियाँ हिंदी में. Moral Stories For Kids In Hindi. प्रेरक कहानियाँ हिंदी में. Reviewed by Hindi Story Of on February 17, 2020 Rating: 5

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